जमशेदपुर: अगर आप सेकेंड हैंड बाइक खरीद रहे हैं तो वाहन के जरूरी कागजात जरूर हासिल कर लें. कागजात पूरे नहीं होने पर बाद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. गालूडीह में बाइक चोरी के एक मामले ने इसे लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक युवक ने करीब डेढ़ साल पहले सेकेंड हैंड बाइक खरीदी थी, लेकिन अब तक उसे ऑनर बुक नहीं मिली. बाइक चोरी होने के बाद पुलिस ने कागजात मांगे तो युवक की परेशानी और बढ़ गयी.
फुटबॉल मैच देखने गया था, वहीं से बाइक चोरी
झाटीझरना पंचायत के फुलझोर गांव निवासी रविदास हेंब्रम की बाइक संख्या जेएच 22 डी 8761 पिछले 9 अगस्त को बाघुड़िया में फुटबॉल मैच के दौरान चोरी हो गयी. रविदास ने मामले की शिकायत गालूडीह थाना में दर्ज करायी है. पुलिस बाइक की तलाश के लिए वाहन की ऑनर बुक और अन्य जरूरी दस्तावेज मांग रही है.
2024 में 57 हजार रुपये में खरीदी थी बाइक
रविदास के अनुसार, उन्होंने 27 फरवरी 2024 को गालूडीह स्थित हीरो शोरूम से सेकेंड हैंड बाइक 57 हजार रुपये में खरीदी थी. बाइक खरीदने के बाद से अब तक उन्हें ऑनर बुक उपलब्ध नहीं करायी गयी. बताया गया कि बाइक अभी भी राजू प्रामाणिक के नाम पर दर्ज है.
कई बार शोरूम गया, लेकिन नहीं मिली ऑनर बुक
रविदास का कहना है कि ऑनर बुक लेने के लिए वह कई बार शोरूम गये. उनका आरोप है कि हर बार उनकी बात को अनसुना कर दिया गया. अब बाइक चोरी होने के बाद पुलिस को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने हैं, लेकिन ऑनर बुक नहीं होने के कारण वह परेशान हैं. बाइक चोरी के बाद रविदास एक ओर पुलिस के साथ बाइक की तलाश में लगा है, तो दूसरी ओर जरूरी कागजात के लिए शोरूम के चक्कर काट रहा है. उनका कहना है कि अगर समय पर ऑनर बुक मिल गयी होती तो चोरी के बाद पुलिस को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में परेशानी नहीं होती.
शोरूम संचालक से जल्द ऑनर बुक देने की मांग
रविदास हेंब्रम ने शोरूम संचालक से जल्द ऑनर बुक उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जरूरी कागजात मिलने से वह पुलिस को उपलब्ध करा सकेंगे और चोरी हुई बाइक की बरामदगी में जांच में सहयोग कर सकेंगे.
सेकेंड हैंड बाइक खरीदते समय कागजात जरूर लें
यह मामला उन लोगों के लिए भी सबक है जो सेकेंड हैंड वाहन खरीदते हैं. वाहन खरीदने के बाद ऑनर बुक समेत सभी जरूरी दस्तावेज अपने नाम और कब्जे में लेना जरूरी है, ताकि भविष्य में वाहन से जुड़ी किसी परेशानी की स्थिति में कागजात के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े.
