टूटी झोपड़ी में रह रही सबर वृद्धा, न पहनने को कपड़ा है न खाने को रोटी
वृद्धा दो माह से बीमार, इलाज तक की व्यवस्था नहीं, सबर को पेंशन व आवास योजना का लाभ नहीं मिला है
By Prabhat Khabar News Desk | Updated at :
गुड़ाबांदा. सबर वृद्धा जिंदगी आदिम युग की दिला रही याद
गुड़ाबांदा.
गुड़ाबांदा प्रखंड की सिंहपुरा पंचायत स्थित माकड़ी गांव के सापुआ टोला में सबर वृद्धा टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को विवश है. वृद्धा की जिंदगी आदिम युग की याद दिला रही है. तमाम सरकारी दावों को खोखला साबित कर रही है. आखिर बरसात में इस टूटी झोपड़ी में सबर वृद्धा कैसे रहती है? यह चिंतनीय है. आज भी अनेक सबर परिवार आदिम युग की जिंदगी जी रहे हैं. सापुआ टोला की ठुंगरी सबर (50) दो महीना से बीमार है. उसके इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं है. वह जिंदगी और मौत के बीज जूझ रहा है. बदन पर कपड़ा व खाने को रोटी नहीं है. उन्हें पेंशन व आवास योजना का लाभ नहीं मिला है. उसका बेटा राम सबर ओडिशा में मजदूरी करता है. पिता छोटो सबर का एक साल पहले देहांत हो चुका है. सिंहपुरा पंचायत के ज्वालकाटा में गुड़ाबांदा प्रखंड कार्यालय है. इसके बावजूद अबतक ठुंगरी सबर जैसी वृद्धा को पेंशन और आवास जैसी सुविधा नहीं मिल पायी है. इन्हें महीने में मात्र सरकार से अनाज मिलता है. स्थानीय जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौन हैं. सरकार की सुविधा प्रखंड कार्यालय के फाइल तक ही सिमटा है.
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