मुसाबनी: मुसाबनी में दक्षिण भारतीय कामगारों द्वारा 1936 में स्थापित मुसाबनी नंबर तीन का शीतला मंदिर इस क्षेत्र का एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. श्रद्धालुओं के सहयोग से पुराने मंदिर का जीर्णोद्वार कर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है. दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष सावन के माह में पूरे माह मंदिर में पूजा होती है.
सावन माह के प्रत्येक शुक्रवार को विशेष पूजा होती है. इसे आडि मास पूजा कहते हैं. आडि मास पूजा में प्रत्येक शुक्रवार को होने वाले विशेष पूजा में मां शीतला की मूर्ति का दूध, दही, मधु, घी, गुलाब जल से स्नान करा कर नये वस्त्र पहना कर फूलों से सिंगार किया जाता है. शुक्रवार विशेष पूजा में घाटशिला, मऊभंडार, मुसाबनी, सूरदा तथा आस पास की महिला भक्त बड़ी संख्या में शामिल होकर मां की पूजा कर अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य तथा रोगों से बचाव की कामना करती है.
पंडित दीपू अन्ना एवं पंडित देवी प्रसाद मिश्र मंदिर में पूजा कर क्षेत्र के लोगों की मंगल कामना करते हैं. सावन माह के अंत में मंदिर में मां शीतला का तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव का आयोजन होता है. इस वर्ष 14 से 16 अगस्त तक वार्षिक उत्सव का आयोजन होगा. 14 अगस्त की सुबह गणेश, कार्तिक एवं शीतला मां के अभिषेक, श्रंगार, हवन एवं महाआरती से तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव का शुभारंभ होगा.
15 अगस्त को सुबह 9:00 बजे से ओम शक्ति मां का अभिषेक एवं मंदिर के उपर कलश की स्थापना की जायेगी. 16 अगस्त को वार्षिक उत्सव के अंतिम दिन सुबह 9:00 बजे से मंदिर प्रांगण से कलश यात्रा नगर भ्रमण के लिए निकला जायेगा.
1936 से शीतला मंदिर में वार्षिक उत्सव एवं पूजा का पारंपरिक ढंग से आयोजन होती आ रही है. पूजा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं मंदिर कमेटी वार्षिक उत्सव के आयोजन की तैयारी में जुटी है.
