जमशेदपुर : कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में जल्द ही इइजी (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) मशीन स्थापित की जायेगी. इसके लग जाने से मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का सटीक पता लगाना आसान हो जायेगा. गरीब मरीजों को इस महंगी जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर नहीं जाना होगा. दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती होती है. अस्पताल में मशीन लगने के बाद यह सुविधा मुफ्त होगी.
मशीन को शिशु व मेडिसिन विभाग के पास स्थापित करने की योजना
वहीं, एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ बलराम झा ने बताया - अस्पताल में दो इइजी मशीन सहित अन्य कई मशीनों की खरीदारी की गयी है. जल्द ही अस्पताल में इसको लगा दिया जायेगा. मशीन को अस्पताल के शिशु व मेडिसिन विभाग के पास स्थापित करने की योजना है, ताकि ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को तुरंत इसका लाभ मिल सके.
क्या होती है इइजी जांच
एमजीएम के शिशुरोग विभाग के डॉ राघवेंद्र ने बताया - अस्पताल में प्रतिदिन कम से कम 20 मरीज ऐसे होते हैं, जिनको इइजी कराने की जरूरत होती है. शहर के निजी क्लीनिकों में इस जांच के लिए 15 से तीन हजार तक वसूले जाते हैं. उन्होंने कहा - इइजी एक खास तरह का न्यूरोलॉजिकल टेस्ट है. इसके जरिये मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों (इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी) और ब्रेन वेव्स को रिकॉर्ड किया जाता है. मिर्गी के दौरे (सीजर्स), नींद की बीमारी और ब्रेन डैमेज जैसी स्थितियों के सही निदान के लिए यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है.
