Jamshedpur news. दलमा में सेंदरा की तैयारी : परंपरा और संरक्षण की ''जंग'', आसमान से ड्रोन, तो जमीन पर 500 जवान रखेंगे नजर

वन विभाग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : 184 वर्ग किमी में बिछा सुरक्षा का जाल, परिंदा भी नहीं मार पायेगा पर

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27 अप्रैल को सेंदरा शिकार पर्व मनाने की आदिवासी समुदाय की घोषणा के बाद से वन विभाग का कान खड़े कर दिये हैं. दलमा में सेंदरा की तैयारी के मद्देनजर इस बार परंपरा और संरक्षण की ”जंग” होने के हालात हैं. 27 अप्रैल को वन विभाग आसमान से ड्रोन, तो जमीन पर 500 जवान शिकार करने वालों पर नजर रखेंगे. वन विभाग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह तैयारी कर रखी है. 184 वर्ग किमी में सुरक्षा का जाल बिछा दिया गया, ताकि परिंदा भी पर न मार पाये. दलमा के डीएफओ की शिकारियों से अपील की है कि वे सेंदरा मनाएं, लेकिन बेजुबानों पर हाथ न उठाएं.

जानकारी के अनुसार आदिवासी समुदाय के पुरुष ही शिकार करने के लिए पहाड़ पर जाते हैं. पूरी एक पूरी रात जंगल में बिताने के बाद शिकार करते हैं. इस बार वन विभाग किसी भी कीमत पर शिकार होने नहीं देगा. दलमा और जमशेदपुर के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने इसके मद्देनजर बैठक की है. बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार, रेलवे समेत तमाम संबंधित विभागों के साथ पत्राचार किया गया है. करीब 500 से अधिक जवान और अधिकारी 184 वर्ग किलोमीटर में फैले दलमा में शिकार को रोकने की कोशिश करेंगे. डीएफओ ने बैठक बताया कि शिकार पर रोक के लिए दलमा जाने वाले 17 रास्तों पर वनकर्मियों की तैनाती की जायेगी और 11 चेकनाके अतिरिक्त बनाये गये हैं. साथ ही ड्रोन से दलमा पहाड़ की निगरानी भी की जायेगी. सेंदरा पर्व के दौरान शिकार रोकने के लिए 10 आइएफएस अधिकारी और दो राज्यों झारखंड और बिहार के वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किये जायेंगे.

डीएफओ सबा आलम अंसारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सेंदरा पर्व को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के रूप में मनायें. जंगल में जाकर पूजा-पाठ करें, लेकिन किसी भी हालत में जंगली जानवरों का शिकार न करें. उन्होंने बताया कि वे लोग आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ वार्ता भी करेंगे. इसे लेकर रेंजरों की टीम लगायी गयी है, जो उनके साथ लगातार समन्वय कर मीटिंग कर रहे हैं, ताकि परंपरा का निर्वहन हो सके और किसी तरह का शिकार नहीं हो. दलमा के गांवों में पंपलेट और हैंडबिल बांटे जा रहे हैं, जिसमें जंगल और जंगली जानवरों के महत्व की जानकारी दी जा रही है. रेलवे से भी मदद ली जा रही है, ताकि रेलवे के माध्यम से शिकारियों की आवाजाही को रोकी जा सके.

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By PRADIP CHANDRA KESHAV

PRADIP CHANDRA KESHAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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