पुस्तक के लेखक अनिल कुमार गुप्ता क्रिसेंट पब्लिक स्कूल चास व बोकारो के संस्थापक प्राचार्य हैं
बोकारो : बोकारो के हर सुदूर भाग का भ्रमण कर व संबंधित दस्तावेजों का शोध कर अनिल कुमार गुप्ता ने ‘बोकारो का इतिहास’ नामक पुस्तक लिखी है, जो शीघ्र प्रकाशित होने वाली है.
पढ़ने-पढ़ाने के शौकीन श्री गुप्ता की मुख्य पहचान क्रिसेंट पब्लिक स्कूल चास व बोकारो के संस्थापक प्राचार्य के रूप में है. श्री गुप्ता ने बताया : ‘बोकारो का इतिहास’ इस्पात नगरी के अतीत की याद को ताजा करेगी. साथ ही बोकारो के बारे में ढेर सारी नयी जानकारी देगी. ‘बोकारो का इतिहास’ नामक पुस्तक में बोकारो के पहले और बोकारो के बाद की पूरी जानकारी समाहित है. राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक स्थिति, बीएसएल की स्थापना, क्षेत्रीय इतिहास, जैन धर्म, हड़ताल व मजदूर संघ, विद्रोहों का आरंभ, सिपाही विद्रोह, द्वितीय विश्वयुद्ध में बोकारो, आर्थिक इतिहास, आकाल-बाढ़-औद्योगीकरण, मानभूम से लेकर धनबाद होते हुए बोकारो जिला बनने तक की पूरी कहानी पुस्तक में विस्तार से बतायी गयी है.
‘झारखंड : फारगोटन वेस ऑफ वर्ल्ड वार’
श्री गुप्ता ने विविध विषयों, जिसमें साहित्य, इतिहास, शिक्षाशास्त्र, महात्मा गांधी व स्वामी विवेकानंद से संबंधित साहित्य शामिल हैं, का व्यापक अध्ययन किया है. उन्होंने अनेक स्मारिकाओं का भी संपादन भी किया है. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बोकारो सहित झारखंड में चली युद्ध की गतिविधियों व 25 हजार वेस्ट अफ्रीकन आर्मी के सैनिकों की ट्रेनिंग से संबंधित शोध किया. ‘झारखंड : फारगोटन वेस ऑफ वर्ल्ड वार’ नाम से पुस्तक का प्रकाशन किया.
‘द्वितीय विश्वयुद्ध में झारखंड’ वीडियो फिल्म
वेस्ट अफ्रीकन आर्मी के सैनिकों की ट्रेनिंग चास के आस-पास बनाये गये ट्रेनिंग कैंप, जिनका मुख्यालय पिंड्राजोरा में था, ने ही अराकान (बर्मा) के युद्ध में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज को हराया था. साथ ही, छर्रा स्थित अमेरिकी वायु सेना के एयरपोर्ट जहां से जापान के स्टील प्लांट पर बम बरसाने के लिए विमानों ने उड़ान भरी थी, पर भी अनिल कुमार गुप्ता ने विस्तृत शोध कर ‘द्वितीय विश्वयुद्ध में झारखंड’ नाम से वीडियो फिल्म बनायी है.
