.बरही ग्रामीण जलापूर्ति परियोजना : 18 वर्षों से अधूरी, ग्रामीणों की प्यास अब भी बाकी

बरही ग्रामीण जलापूर्ति परियोजना की कहानी झारखंड में अधूरे वादों का प्रतीक बन चुकी है.

31 मार्च तक जलापूर्ति मंत्री का आश्वासन नहीं हुआ पूरा जावेद इस्लाम बरही. बरही ग्रामीण जलापूर्ति परियोजना की कहानी झारखंड में अधूरे वादों का प्रतीक बन चुकी है. वर्ष 2007-08 में इस योजना की शुरुआत 10 करोड़ 16 लाख रुपये की प्राक्कलित राशि से हुई थी. उद्देश्य था-बरही नगर और आसपास की पंचायतों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना. लेकिन 18 वर्षों बाद भी यह योजना अधूरी है और ग्रामीणों को अब भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. योजना का पुनर्गठन और नयी समय सीमा वर्ष 2023 में सरकार ने इस योजना का पुनर्गठन किया और 10 करोड़ 27 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की. इसके साथ ही जून 2025 तक योजना को पूर्ण कर जलापूर्ति सुनिश्चित करने की समय सीमा तय की गयी. यह ग्रामीणों के लिए उम्मीद की किरण थी, लेकिन आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी. प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या बरही नगर सहित बरही पूर्वी पंचायत, बरही पश्चिमी पंचायत, कोनरा पंचायत, रसोईया धमना पंचायत और बेंदगी पंचायत के करीब 25-30 हजार ग्रामीण इस जलापूर्ति प्लांट से शुद्ध पेयजल मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. वर्षों से लोग इस योजना के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हर बार नई बाधाएं सामने आ जाती हैं. विधानसभा में उठे सवाल और मंत्री का आश्वासन 18 मार्च 2024 को बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने झारखंड विधानसभा में इस लंबित परियोजना का मुद्दा उठाया. जवाब में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के चौड़ीकरण के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई. एनएचएआई पाइपलाइन की शिफ्टिंग का काम कर रही है और 31 मार्च तक परीक्षण पूरा कर लिया जायेगा. लेकिन 31 मार्च की समय सीमा बीत गयी. न तो पाइपलाइन की शिफ्टिंग हुई और न ही जलापूर्ति का परीक्षण. स्थिति जस की तस बनी हुई है. जब तक पाइपलाइन की शिफ्टिंग नहीं होगी, जलापूर्ति का परीक्षण संभव नहीं है जल स्वच्छता विभाग के कनिष्ठ अभियंता आकिब अहमद ने बताया कि एनएचएआइ ने पाइपलाइन शिफ्टिंग का काम नहीं किया. बरही चौक से कोबरा मुख्यालय तक राइजिंग पाइप की शिफ्टिंग और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास एनएच-31 सड़क क्रॉसिंग का काम एनएचएआई को करना है. सड़क चौड़ीकरण के दौरान ठेकेदार ने पाइपलाइन क्षतिग्रस्त कर दी थी. विभाग ने कई बार एनएचएआई के परियोजना निदेशक को पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. जब तक पाइपलाइन की शिफ्टिंग नहीं होगी, जलापूर्ति का परीक्षण संभव नहीं है. बरही में पानी की समस्या बरही में मार्च महीने से ही पानी की समस्या शुरू हो गयी है. भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और चापाकलों में पानी कम होने लगा है. सबसे खराब स्थिति बरही चौक से लगे तेली टोला और धोबी टोला की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां लगे चापाकलों में मुश्किल से पंद्रह दिन और पानी मिलेगा. इसके बाद टैंकर से जलापूर्ति करनी पड़ेगी, जैसा कि पिछले वर्षों में भी करना पड़ा था.

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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