जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं : मुनिश्री

मुनि श्री 108 समता सागर महाराज संघ का नगर में 11 मई को मंगल प्रवेश हुआ. सोमवार को आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का महापूजन समारोह श्रद्धा, भक्ति व उल्लास के साथ संपन्न हुआ.

हजारीबाग. मुनि श्री 108 समता सागर महाराज संघ का नगर में 11 मई को मंगल प्रवेश हुआ. सोमवार को आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का महापूजन समारोह श्रद्धा, भक्ति व उल्लास के साथ संपन्न हुआ. प्रातः मुनिश्री ने बड़ा बाजार जैन मंदिर में दर्शन करने के बाद बड़म बाजार जैन मंदिर पहुंचे, जहां सुबह आठ बजे महापूजन कार्यक्रम शुरू हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य श्री के चित्र के अनावरण और दीप प्रज्वलन से हुई. समारोह में समाज के अध्यक्ष, मंत्री, कार्यकारिणी सदस्यों, महिला समाज की पदाधिकारी व पूर्व अध्यक्ष शामिल हुए. रिद्धिश और जिनिशा छाबड़ा ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया. महिला समाज की ओर से मुनिश्री को शास्त्र भेंट किया गया. शांतिधारा अभिषेक करने वाले को मुनिश्री समता सागर व पवित्र सागर के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त हुआ. क्षुल्लक संयम सागर, एलक निजानंद सागर, एलक निश्चय सागर, मुनि श्री 108 पवित्र सागर और अंत में पूज्य मुनि श्री 108 समता सागर महाराज ने प्रवचन दिये. मुनिश्री ने कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं. उन्होंने समाज को अपने नाम में जैन शब्द जोड़ने का आग्रह किया. कहा कि इससे जैन समाज की वास्तविक संख्या का आकलन संभव हो सकेगा. उन्होंने बताया कि केवल महाराष्ट्र में ही 50-60 लाख जैन रहते हैं, परंतु अलग-अलग टाइटल के कारण आंकड़े स्पष्ट नहीं हो पाते हैं. संध्या 6.30 बजे आचार्य भक्ति, गुरु भक्ति, आरती तथा शंका समाधान का कार्यक्रम हुआ. मंच संचालन विजय लुहाड़िया ने किया. मौके पर मीडिया प्रभारी राजेश लुहाड़िया भी उपस्थित थे.

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