महिलाओं के अधिकारों की रक्षा विवि की जिम्मेदारी : प्रो त्रिपाठी

विभावि में मानव अधिकार व लैंगिक समानता पर कार्यशाला

हजारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में रविवार को मानव अधिकार एवं लैंगिक समानता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नयी दिल्ली के झारखंड स्पेशल मॉनिटर प्रो कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करें. मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ायें. उन्होंने कहा कि आज समाज ग्रीड और नीड आधारित होता जा रहा है, जिससे मानव अधिकारों का उल्लंघन बढ़ रहा है. संग्रह की प्रवृत्ति पर नियंत्रण और त्याग की भावना अपनाने की जरूरत है. उन्होंने विश्वविद्यालय में ह्यूमन राइट्स सेल और ह्यूमन राइट्स क्लब के गठन का सुझाव दिया. साथ ही मानव अधिकार पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए वार्षिक पुरस्कार शुरू करने की बात कही. प्रो त्रिपाठी ने नये सत्र से ह्यूमन राइट्स एंड हैप्पीनेस पाठ्यक्रम शुरू करने और संभव हो तो अलग विभाग खोलने की भी सिफारिश की. उन्होंने छात्राओं के लिए सुरक्षित व स्वच्छ वातावरण पर जोर देते हुए छात्रावास में वेंडिंग मशीन, सैनिटरी पैड्स और साफ-सुथरे शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही. साथ ही थर्ड जेंडर और दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की. कुलसचिव डॉ प्रणिता ने अतिथि का स्वागत किया. सीसीडीसी प्रो मिथिलेश कुमार सिंह ने विषय प्रवेश कराया. डॉ गंगानंद सिंह ने पीपीटी के माध्यम से विश्वविद्यालय में मानव अधिकार से जुड़े कार्यों की जानकारी दी. धन्यवाद ज्ञापन डॉ विकास कुमार ने किया. कार्यशाला के बाद प्रो त्रिपाठी ने सरोजिनी नायडू छात्रावास का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर संतोष जताया. उन्होंने छात्रों की समस्याओं के समाधान, साइबर सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी.

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Published by: Sunil prasad

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