कटकमसांडी. कटकमसांडी के आसान जंगल स्थित बड़कीतरी के पास करीब 20 एकड़ वनभूमि पर पेड़-पौधों की अवैध कटाई कर उस पर खेती की जा रही है. इस मामले के उजागर होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो गया है. घने जंगल के बीच सैकड़ों पेड़ों को काटकर टमाटर और धान की खेती की जा रही है. जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है. आसपास बड़ी मात्रा में काटी गयी लकड़ियां पड़ी हुई हैं, जो संगठित तरीके से जंगल उजाड़ने की ओर इशारा कर रही हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े क्षेत्र में लगातार हो रही कटाई और खेती बिना वन विभाग की जानकारी के संभव नहीं है. उनका कहना है कि यह सब वनरक्षक और स्थानीय वन समिति की मिलीभगत से हो रहा है. जब जंगल की सुरक्षा के लिए वन एवं पर्यावरण प्रबंधन समिति का गठन किया गया है, तो अवैध गतिविधि पर रोक क्यों नहीं लगायी गयी? स्थानीय लोगों के अनुसार यह सिलसिला कई वर्षों से जारी है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. इससे वन विभाग की भूमिका पर संदेह गहरा गया है. पर्यावरणविदों का कहना है कि 20 एकड़ में जंगल की कटाई से लाखों रुपये की वन संपदा का नुकसान हुआ है. इससे पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर असर पड़ा है. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी वनकर्मियों पर कार्रवाई करने और स्थानीय वन समिति को तत्काल भंग करने की मांग की है.
क्या कहते हैं वनपाल
इस संबंध में वनपाल सुजीत टोप्पो ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है. जांच-पड़ताल की जा रही है. जंगल उजाड़ने और फिर उसपर खेती करने का मामला काफी गंभीर और संवेदनशील है. इस मामले में दोषियों पर केस दर्ज कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
