हजारीबाग. विभावि में शनिवार को विकसित भारत 2047 के लिए अनुसंधान : समस्या की पहचान से नीतिगत प्रभाव तक विषय पर स्वामी विवेकानंद सभागार में व्याख्यान हुआ. कार्यक्रम पीएम ऊषा के मेरु घटक के अंतर्गत संपन्न हुआ. अध्यक्षता कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने की. मुख्य अतिथि प्रो अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि प्रतिभाशाली छात्रों को आधुनिक विज्ञान और राष्ट्रीय मिशनों से जोड़ना समय की मांग है. उन्होंने विचारों को समझकर प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए शोध में नैतिकता और मूल्यों के समावेश को जरूरी बताया. उन्होंने ‘ईशावास्यमिदं सर्वं’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिक कार्यों में जिम्मेदारी का भाव रखने की बात कही. जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और चौथी औद्योगिक क्रांति की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए पाठ्यक्रम नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया. कार्बन उत्सर्जन घटाने व नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की भी अपील की. कुलपति ने कहा कि समन्वित प्रयासों से ही विकसित भारत का लक्ष्य हासिल होगा. कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी भी हुई. संचालन डॉ अरुण कुमार मिश्रा ने किया.
शोध में नैतिकता और मूल्यों का समावेश जरूरी : डॉ अविनाश
विभावि में व्याख्यान
