..विभावि में हजारीबाग लेक्चरर्स का आयोजन, इतिहास के पुनर्लेखन पर जोर

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा 16 मार्च को राधाकृष्णन सभागार में हजारीबाग लेक्चरर्स का आयोजन किया गया.

हजारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा 16 मार्च को राधाकृष्णन सभागार में हजारीबाग लेक्चरर्स का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रख्यात इतिहासकार प्रो. कपिल कुमार थे, जिन्होंने भारत का विभाजन: वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास का पुनर्लेखन अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर 1857 से 1947 के कालखंड का. उन्होंने सवाल उठाया कि 1929 में पूर्ण स्वराज का संकल्प लेने के बावजूद विभाजन के समय भारतीय नेतृत्व डोमिनियन स्टेटस पर क्यों सहमत हुआ.

प्रो. कुमार ने यह भी चिंता जतायी कि आजाद हिंद फौज के सैनिकों को 1973 तक स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा नहीं मिला. उन्होंने प्रश्न किया कि अंतरिम सरकार के गठन के समय महात्मा गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के नाम की सिफारिश क्यों की, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सामने थे. साथ ही उन्होंने अशफ़ाकउल्ला खान, अब्दुल हमीद और मकबूल शेरवानी जैसे राष्ट्रवादी मुसलमानों को इतिहास में अपेक्षित स्थान न मिलने पर चर्चा की.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने की. उन्होंने कहा कि प्रो. कपिल कुमार अपनी बेबाक शैली और तथ्यों पर आधारित तर्कों के लिए जाने जाते हैं. विभागाध्यक्ष डॉ. हितेंद्र अनुपम ने कार्यक्रम का संचालन किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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