त्याग, भाईचारे और अमन का पैगाम लेकर आयी बकरीद

हजारीबाग में ईद-उल-अजहा का पर्व श्रद्धा, त्याग और भाईचारे के साथ मनाया गया.

हजारीबाग. हजारीबाग में ईद-उल-अजहा का पर्व श्रद्धा, त्याग और भाईचारे के साथ मनाया गया. मुस्लिम समुदाय ने पैगंबर हजरत इब्राहिम और उनके पुत्र हजरत इस्माईल की सुन्नत का पालन करते हुए नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी दी. शहर और आसपास की सभी मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गयी. जामा मस्जिद में काजी पेश इमाम मौलाना अब्दुल जलील कादरी ने नमाज पढ़ायी. वहीं सरदार मस्जिद में मौलाना मुनाजिर हुसैन, ग्वालटोली मस्जिद में मौलाना गुलाम वारिस, अजमेरी मस्जिद चिश्तिया मोहल्ला में सैयद कामरान व इमाम अब्दुल वाहिद मिसबाही ने सुलतानुल हिंद मस्जिद पगमिल में नमाज अदा करायी. सभी मस्जिदों में नमाज के बाद सामूहिक दुआ में देश में अमन, चैन और भाईचारे के लिए दुआ मांगी गयीं. जामा मस्जिद, लाखे मस्जिद, खिरगांव मस्जिद, नूरा मस्जिद, इंद्रपुरी मस्जिद, पेलावल मस्जिद, लोहसिंघना मस्जिद, मटवारी मस्जिद सहित शहर के सभी मस्जिदों में नमाज अदा की गयी. नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी. इसके बाद लोग अपने-अपने घरों में कुर्बानी दी. कुर्बानी के बाद तबर्रुक (पवित्र भोजन) को गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों में वितरित किया गया. समाजसेवी फहीम उद्दीन अहमद उर्फ संजर मलिक ने कहा कि बकरीद पर्व त्याग, आज्ञा और समर्पण का प्रतीक है. यह हमें सिखाता है कि अपनी आत्मा में विनम्रता और समर्पण कैसे लाया जाये.

सुरक्षा के थे पुख्ता इंतजाम

बकरीद को लेकर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. सभी चौक-चौराहों पर मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गयी थी. पुलिस बल के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी तैनात किया गया था. किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए जिला प्रशासन लगातार निगरानी कर रही थी.

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