सलाउद्दीन
हजारीबाग : वनांचल शिशु विद्या मंदिर हजारीबाग के लगभग 500 विद्यार्थी उर्दू पढ़ रहे हैं. कक्षा तीन से दसवीं तक के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में एच्छिक नहीं, बल्कि अनिवार्य विषय उर्दू है. उर्दू विषय की जानकारी विद्यार्थियों में देख प्रतीत होता है कि भाषा किसी क्षेत्र, प्रांत, संप्रदाय का नहीं होता. सरस्वती वंदना के साथ कक्षा प्रारंभ कर उर्दू की पढ़ाई कर हिंदुस्तानी संस्कृति की झलक इस स्कूल में देखने लायक है.
स्कूल के उर्दू कक्षा का माहौल: हजारीबाग विष्णुगढ़ मार्ग पर जबरा-कोर्रा में वनांचल शिशु विद्या मंदिर है. वर्ष 2000 से विद्यालय में प्रेप से लेकर दसवीं तक की पढ़ाई हो रही है. विद्यार्थियों को भैया-बहन और शिक्षक को आचार्य कह कर संबोधित किया जाता है. सभी विद्यार्थी जूता बाहर खोल कक्षा में प्रवेश करते हैं.
हर कक्षा में मां सरस्वती, मां दुर्गा, स्वामी विवेकानंद और देश के वर्तमान एवं पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों की तस्वीरें लगी हैं. भारतीय संस्कार, देश प्रेम के साथ भारतीय शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से विद्यालय के पठन-पाठन व माहौल में दिखाई पड़ता है. अन्य विषयों की तरह उर्दू की पढ़ाई भी सभी विद्यार्थी रुचि के साथ करते हैं. दसवीं कक्षा में 50 से अधिक विद्यार्थी उर्दू की पढ़ाई कर रहे थे. उर्दू शिक्षक इरफान को विद्यार्थी आचार्य कह कर संबोधित कर रहे थे. पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों का उर्दू उच्चरण, शब्द कोश और उर्दू लिखावट देख जितनी तारीफ की जाये, कम है.
क्या कहते हैं विद्यार्थी: दसवीं कक्षा की छात्र किरण कुमारी, लाड़ली राय, प्रियंका कुमारी निशि राय, अमित कुमार, राहुल कुमार मेहता, काजल कुमारी समेत कई विद्यार्थियों ने बताया कि उर्दू में 80 प्रतिशत से अधिक अंक उन्हें परीक्षा में आता है. उर्दू जाति, पंथ की भाषा नहीं मानते हैं.
यह हिंदुस्तानी व रोजगार की भाषा है. निशि राय ने बताया कि कक्षा तीन में उर्दू की पढ़ाई शुरू करना था, जिससे काफी उत्साहित थे. किरण कुमारी ने बताया कि जब हमारे सगे संबंधी जानते हैं कि उर्दू पढत़ी हूं तो उन्हें विश्वास नहीं होता. उनके सामने उर्दू पढ़ और लिख कर प्रमाणित करना होता है. अमित कुमार ने बताया कि अन्य विषयों की तरह उर्दू को महत्व देता हूं, लेकिन उर्दू पढ़ने से दूसरे विद्यार्थियों से अलग एक महत्वपूर्ण भाषा जाननेवाला बन गया हूं. प्रियंका कुमारी ने बताया कि मैं अपने परिवार के सदस्यों को भी उर्दू सिखा रही हूं. इसी तरह सभी विद्यार्थियों ने उर्दू पढ़ने से संतुष्टि व अपने को गौरवांवित समझ रहे थे.
रामदेव व डॉ प्रणव पांडया को प्रभावित किया
विद्यार्थी शैक्षणिक भ्रमण में हरिद्वार व शांतिकुंज गये थे. योग गुरु बाबा रामदेव से विद्यार्थियों की मुलाकात हुई थी. सभी विद्यार्थी उर्दू के जानकार हैं. इस पर बाबा रामदेव विद्यार्थियों की काफी तारीफ की.
इसी तरह शांतिकुंज में भी विद्यार्थी मां गायत्री ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ प्रणव पांडया एवं शैप्रजा दीदी से मिले थे. डॉ पांडया ने एक छात्र से उर्दू लिखवाया. इसके बाद कहा कि इन विद्यार्थियों से अब हमलोगों उर्दू पढ़ने की जरूरत है.प्रधानाचार्य अभिनय दीप ने बताया कि विद्यालय परीक्षाफल शत प्रतिशत होता है. उर्दू विषय में विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं.
