स्वास्थ्य विभाग ने मांगी रिपोर्ट, छह वर्ष तक बैंक में जमा रहे रुपये
हजारीबाग : भारत सरकार द्वारा राशि उपलब्ध कराने के बावजूद भी ट्रामा सेंटर का संचालन हजारीबाग में नहीं हो रहा है. इसके लिए 2006 में केंद्र सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपये का आवंटन उपलब्ध कराया था.
बावजूद हजारीबाग स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से ट्रामा सेंटर चालू नहीं हो सका. सदर अस्पताल परिसर में 2012 से ट्रामा सेंटर बन कर तैयार है. भवन बनाने में 68 लाख रुपये की लागत आयी है. 2015 में 52 लाख रुपये के संसाधनों की खरीद की गयी. तत्कालीन सीएस डॉ धर्मवीर ने खरीदे गये ट्रामा सेंटर के उपस्करों को अपने सरकारी आवास में रखवा दिया.
तब से यह सामान सीएस के सरकारी आवास में पड़ा हुआ था. ट्रामा सेंटर चालू नहीं होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने डीसी और सीएस से रिपोर्ट मांगी. जिसमें कहा गया है कि राशि उपलब्ध कराये जाने के 10 वर्ष बाद भी ट्रामा सेंटर चालू क्यों नहीं हुआ. डीसी ने तत्काल दंडाधिकारी रामरतन वर्णवाल को प्रतिनियुक्त कर सामानों की इनवेंटरी करायी.
2012 में ट्रामा सेंटर के लिए भवन निर्माण : ट्रामा सेंटर भवन निर्माण में पूर्व सीएस ने 68 लाख रुपये खर्च किये.ट्रामा सेंटर का भवन बन कर तैयार होने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग ने इसका उदघाटन नहीं किया. तत्कालीन सीएस डॉ धर्मवीर ने 52 लाख रुपये के उपस्कर खरीदें. सीएस ने सदर अस्पताल के स्टोर में उपस्कर को रखने के बजाय अपने सरकारी आवास में रख दिया. प्रधान सचिव के आदेश पर सीएस के सरकारी आवास से उपस्कर की इनवेंटरी करायी गयी. 52 लाख के खरीदे गये सामानों का मिलान मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में किया जा रहा है.
उपस्कर के मिलान होने के बाद इसे वर्तमान सीएस डॉ आरएस वंदना को हैंडओवर किया जायेगा. डॉ आरएस वंदना ने कहा कि ट्रामा सेंटर की इस सामग्री को सदर अस्पताल के स्टोर में रखा जायेगा. इनवेंटरी टीम में सीएस आरएस वंदना, एसीएमओ डॉ शशि शेखर, कुपोषण केंद्र प्रभारी डॉ दांगी का नाम शामिल है. इनकी उपस्थिति में सभी सामानों का मिलान किया जा रहा है.
