क्षणिक सुख देनेवाली चीजें आजीवन नहीं रहती

हजारीबाग : जैन मुनि श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि धारा के विपरीत बहना साधु-संतों का जीवन है. महाराज ने बड़ा बाजार दिगंबर जैन मंदिर में प्रात: अपने मंगल प्रवचन से श्रद्धालुओं को अध्यात्म के रस से सराबोर कर दिया. कहा कि प्रत्येक मनुष्य रंग, रूप, रूतबा के पीछे […]

हजारीबाग : जैन मुनि श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि धारा के विपरीत बहना साधु-संतों का जीवन है. महाराज ने बड़ा बाजार दिगंबर जैन मंदिर में प्रात: अपने मंगल प्रवचन से श्रद्धालुओं को अध्यात्म के रस से सराबोर कर दिया. कहा कि प्रत्येक मनुष्य रंग, रूप, रूतबा के पीछे जीवन भर भागता रहता है.
परंतु उसे यह मालूम नहीं की ये क्षणिक सुख देनेवाली चीजें आजीवन नहीं रहती है. मनुष्य के साथ धर्म, अध्यात्म एवं उसके द्वारा किये गये अच्छे कार्य ही होते हैं. उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में लोग निरंतर धन अजिर्त कर रहे हैं. लेकिन धर्म का अजर्न बहुत कम लोगों द्वारा किया जाता है. मनुष्य सुख में धन की खोज करता है. दुख के समय उसे धर्म याद आता है. मीडिया प्रभारी विजय लुहाड़िया ने बताया कि मुनीश्री का मंगल प्रवचन प्रतिदिन प्रात: हो रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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