हजारीबाग : श्रीकृष्ण आरक्षी बालक आवासीय उवि की अपनी पहचान धूमिल हो रही है. स्कूल में शिक्षकों की कमी है.14 शिक्षक-शिक्षिकाओं में मात्र सात शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं. विषयवार शिक्षक नहीं हैं. स्कूल में 350 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं.
हॉस्टल सुविधाविहीन : स्कूल परिसर में ही हॉस्टल है. इसकी 60 विद्यार्थी की क्षमता हैं. वर्तमान में हॉस्टल रख-रखाव के अभाव में जजर्र हो गया है. इसमें 20 विद्यार्थी रह रहे हैं.
चहारदीवारी नहीं : स्कूल परिसर की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त है. लोग हर तरफ से स्कूल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं. जानवर का भी आना-जाना लगा रहता है. खेल का मैदान ढंग का नहीं है.
स्कूल में कंप्यूटर की कमी : स्कूल में बच्चों के अनुपात के अनुसार कंप्यूटर नहीं है. बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा सही तरीके से नहीं मिल रही है. एक निजी कंपनी ने स्कूल को वर्ष 2009 में तीन कंप्यूटर दिया है. स्कूल प्रबंधन इसी कंप्यूटर से बच्चों को शिक्षा दे रहा है.
स्कूल का इतिहास : 1953 में स्कूल की स्थापना हुई. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के नाम पर इस स्कूल का नाम रखा गया. स्कूल में पुलिसकर्मियों के बच्चे पढ़ेंगे को ध्यान में रख कर देखरेख की जिम्मेवारी पीटीसी को मिली. जिस जगह पर स्कूल है वह क्षेत्र पुलिस विभाग से जुड़ा है. वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य बनने के बाद पुलिस अपनी जिम्मेवारी निभाने में कोताही बरती है.
हॉल की स्थिति खराब : अंग्रेज के समय स्कूल परिसर में बने हॉल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गये हैं. मरम्मत के अभाव में हॉल दिन प्रतिदिन खराब हो रहा है.
पुलिस विभाग व सरकार के आपसी पेंच में स्कूल का विकास अवरुद्ध
प्रभारी प्रधानाध्यापक अश्विनी कुमार झा ने बताया कि वर्ष 2002 में राज्य सरकार ने 10 लाख रुपये स्कूल के विकास के लिए दिये. लेकिन पुलिस विभाग ने अपनी देखरेख में चलाने की बात कह कर राशि को वापस कर दिया.
स्कूल में पुलिस ही नहीं हर वर्ग के बच्चे और दूर-दराज के बच्चे पढ़ने आते हैं. इस वर्ष स्कूल ने बेहतर रिजल्ट दिया है. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग एवं सरकार के आपसी पेंच में स्कूल का विकास अवरुद्ध है.
