… लावालौंग के सुदूरवर्ती गांवों में भी पंचायत चुनाव की गूंजवोट को लेकर मतदाता उत्साहित. एक दशक पूर्व तक मतदाता वोट करने से डरते थे. नक्सलियों के डर से वोट नहीं कर पाते थे.लावालौंग. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गूंज जिले के अति उग्रवाद प्रभावित लावालौंग के सुदूरवर्ती गांवों में भी सुनाई पड़ रही है. प्रखंड की रिमी, सिलदाग, कोलकोले, कटिया, हेडुम, लावालौंग आदि पंचायतों में चुनाव को लेकर चर्चा जोरों पर है़ एक दशक पूर्व यहां के लोग चुनाव के नाम से सहम जाते थे़ नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार का असर उक्त क्षेत्रों में हर चुनाव में देखा जाता था़ अब लोग बेखौफ व निष्पक्ष होकर मतदान में भाग ले रहे हैं. लावालौंग में चौथाे चरण में 12 दिसंबर को मतदान होना है़ इस बार के पंचायत चुनाव में जिला परिषद के तीन प्रत्याशी के अलावा कई मुखिया, पंचायत समिति सदस्य व वार्ड सदस्य के रूप में भाग्य आजमा रहे हैं. सभी प्रत्याशी ने प्रचार- प्रसार तेज कर दिया है. शुक्रवार को चुनाव चिह्न मिलते ही प्रत्याशी प्रचार अभियान में लग गये़ गांवों में पंचायत चुनाव को लेकर चौपाल लग रहा है़ हमेशा सूनी रहने वाली गलियां गुलजार है़ मतदाता गांव की सरकार चुनने को लेकर बेताब हैं. नये मतदाताओं में वोट करने को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है़ प्रत्याशी भी बगैर डर से अपने पक्ष में प्रचार कर रहे हैं.
... लावालौंग के सुदूरवर्ती गांवों में भी पंचायत चुनाव की गूंज
… लावालौंग के सुदूरवर्ती गांवों में भी पंचायत चुनाव की गूंजवोट को लेकर मतदाता उत्साहित. एक दशक पूर्व तक मतदाता वोट करने से डरते थे. नक्सलियों के डर से वोट नहीं कर पाते थे.लावालौंग. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गूंज जिले के अति उग्रवाद प्रभावित लावालौंग के सुदूरवर्ती गांवों में भी सुनाई पड़ रही है. प्रखंड […]
