आदिवासी आक्रोश रैली में उमड़ी भीड़, बोलीं दयामनी बारला, आदिवासियों को बेदखल कर रही है सरकार

हजारीबाग: उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल स्तरीय आदिवासी आक्रोश रैली में सरकार के खिलाफ गुस्सा देखा गया. मंगलवार को हजारीबाग में बड़ी संख्या में लोगों ने रैली निकाली. वहीं शहर के जिला स्कूल मैदान में विशाल जनसभा का आयोजन किया गया. रैली में हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो व धनबाद से काफी संख्या में आदिवासी समाज […]

हजारीबाग: उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल स्तरीय आदिवासी आक्रोश रैली में सरकार के खिलाफ गुस्सा देखा गया. मंगलवार को हजारीबाग में बड़ी संख्या में लोगों ने रैली निकाली. वहीं शहर के जिला स्कूल मैदान में विशाल जनसभा का आयोजन किया गया. रैली में हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो व धनबाद से काफी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे थे. रैली के माध्यम से झारखंड सरकार पर कई आरोप लगाये गये.

वहीं पिछले तीन वर्षों में झारखंड के आदिवासियों, मूलवासियों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों को जमीन से बेदखल करने का विरोध किया गया. सभा की अध्यक्षता सुशील औड़ेया ने की, जबकि संचालन विमल बिरुआ व पीटर पॉल टोप्पो ने किया. मुख्य वक्ता दयामनी बरला ने कहा: झारखंड सरकार ने 12 अगस्त को झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक-2017 और भूमि अर्जन, पुनर्वास, पुर्नस्थापन अधिकार विधेयक-2017 को विधानसभा में पारित किया. दोनों विधेयक आदिवासियों के संविधान द्वारा प्रदत अधिकारों का हनन करती है. आदिवासी समुदाय दोनों विधेयकों का विरोध करती है.

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन ग्रामसभा के हाथों हो
मुख्य वक्ता नुनूलाल मरांडी ने कहा कि धर्म स्वतंत्र विधेयक-2017 संविधान में उल्लेखित नियमों का उल्लंघन है. दिलीप मिंज ने कहा कि वन अधिकार कानून 2006 एवं सुप्रीम मोर्ट के आदेशानुसार अनुसूचित क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन ग्रामसभा द्वारा हो, जिसे लागू करने का अधिकार सरकार को है, लेकिन सरकार लागू नहीं कर रही है. नीरज बेसरा ने कहा कि समता जजमेंट 1997 उच्चतम न्यायालय के अनुसार पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में केंद्र सरकार का राज्य सरकार की एक इंच भी जमीन नहीं है. इन क्षेत्रों में सरकार द्वारा विकास के नाम पर जमीन अधिग्रहण कर लैंड बैंक बनाना असंवैधानिक है.
सरना कोड लागू करे सरकार
जिप सदस्य अग्नेशिया सांडी पूर्ति ने कहा कि संविधान प्रदत ग्राम सभा के अधिकार को लागू किया जाये. झारखंड में सरना कोड अविलंब लागू हो. जाति प्रमाण पत्र में धर्म का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए. जाति प्रमाण पत्र में समयावधि को लगाया जाना अनुचित है. कृष्णा विनहा, दिलीप कुजूर व आदित्य टूटी ने कहा कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय में आदिवासी विश्वविद्यालयों के लिए पीजी छात्रावास बने. कल्याण विभाग द्वारा सभी आदिवासी छात्रावास में समुचित व्यवस्था उपलब्ध करायी जाये. सभी स्कूल एवं कॉलेजों में जनजातीय भाषा की पढाई को जल्द प्रारंभ किया जाये. आकाश टुटु, सुनील उरांव, गंदूर मुंडा बोकारो ने कहा कि सरकारी नौकरियों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा को शामिल किया जाये. सरकार शराब बेचने पर प्रतिबंध लगाये. जेपीएससी और जेएससीसी में आरक्षण कोटा का पालन हो.
अल्पसंख्यक विद्यालयों में शिक्षक शिक्षिकाओं का अनुमोदन हो
सुरेश उरांव, निर्मला व कार्तिक उरांव ने कहा कि अल्पसंख्यक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शिक्षिकाओं का अनुमोदन किया जाये. विनोबा भावे विश्वविद्यालय में आदिवासी शिक्षक, सहायक शिक्षक की बहाली की जाये. कार्यक्रम को फागू बेसरा, महालाल हांसदा, आनंद सोरेन, रामधनी टुडू, अनिल टोप्पो, सबीता खाखा, सरिता टोप्पो, बसंती पन्ना, रामू, सुषमा एक्का, स्थेर डांगा ने भी संबोधित किया. इससे पहले बिरसा चौक में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. वहीं महामहिम राज्यपाल के नाम उपायुक्त हजारीबाग को ज्ञापन सौंपा गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

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