गिद्दी(हजारीबाग):अंचलकर्मियों की मिलीभगत आैर गलत कागजात दिखा कर हेसालौंग के एक परिवार ने गैरमजरूआ व वन विभाग की लगभग 20 एकड़ जमीन अपने नाम कर ली है. गैरमजरूआ जमीन निर्गत करने की फिलहाल मनाही है. इसके बाद भी ऑनलाइन रसीद निर्गत कर दी गयी है. यह मामला अब तूल पकड़ रहा है.
हेसालौंग गांव के कई ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी को पत्र देकर ऑनलाइन डाटावेश तथा रजिस्ट्रर दो से इसे हटाने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस पर उचित कदम नहीं उठाया गया, तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन से भी की जायेगी. डाड़ी अंचलाधिकारी एचएम केरकेट्टा ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस मामले में गड़बड़ी दिख रही है. इसकी जांच शुरू कर दी गयी है. इस पर रोक लगा दी गयी है.
जानकारी के अनुसार, हेसालौंग गांव के बिजेंद्रनाथ तिवारी आजादी के पहले जमीनदार थे. आजादी के बाद सरकार ने जमीनदारों की जमीन के लिए एक नियम बनाया. इसके तहत गांव के लगभग 100 रैयतों को हुकुमनामा के बल पर जमीनदार बिजेंद्रनाथ तिवारी ने कई एकड़ जमीन दे दी. यह जमीन रैयतों के पास अब भी है.
बताया जा रहा है कि उसी दौरान बिजेंद्रनाथ तिवारी ने अपनी पहली पत्नी चंपा देवी के नाम पर 66 नंबर खाता में लगभग 20 एकड़ जमीन हुकुमनामा के बल पर दिया था. जिस जमीन को दिखाया जा रहा है, वह गैरमजरूआ व वन विभाग की है.
बिजेंद्रनाथ तिवारी ने हुकुमनामा के बल पर जिन रैयतों को जमीन दी है, वे सभी 50-60 के दशक में ही जमाबंदी करा ली है. चंपा देवी की मौत 40 वर्ष पहले हुई है. उनके नाम पर जमीन की यह जमाबंदी वर्ष 1987-88 से दिखायी जा रही है.
रसीद हाल ही में अप-टू-डेट किया गया है. लोगों का कहना है कि हेसालौंग माइंस, वनविभाग और यहां की गैरमजरूआ जमीन को लूटने के लिए यह खेल सुनियोजित ढंग से खेला गया है. कुछ जानकार लोगों ने बताया कि वर्ष 1982 में हुकुमनामा को समाप्त कर दिया गया है. ऐसी स्थिति में अगर इस जमीन की जमाबंदी 1987-88 में की गयी है, तो इस दृष्टिकोण से इस पर सवाल उठना उचित है.
डाड़ी अंचल में सिर्फ चंपा देवी की जमीन की रसीद काटी गयी है और ऑनलाइन है. हजारीबाग उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने कहा कि इसकी जांच होगी. जांच में गड़बड़ी पायी जायेगी, तो कार्रवाई होगी.
