पतरातू: पीटीपीएस की माटी को कभी भूल नहीं सकते हैं. पीटीपीएस से गहरा लगाव है. यहां पर जन्म लिया और पला- बढ़ा हूं. पतरातू की सुंदरवादियां हमेशा अपनी ओर आकर्षित करता है. उक्त बातें भोजपुरी के कलाकार आनंद मोहन ने कही. वे बुधवार को पतरातू में प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि वे प्रत्येक वर्ष अपनी मां, भाई व अन्य रिश्तेदारों के साथ छठ पर्व मनाने के लिए पतरातू आते हैं. यहां के लोगों के साथ मिल कर छठ पर्व मनाते हैं.
उन्होंने कहा कि पीटीपीएस में वर्षों से रह रहे लोगों को हटाया गया, यह जान कर दिल को अघात लगा है. पूरे पीटीपीएस को खाली कराने की तैयारी चल रही है. अगर पीटीपीएस ही नहीं रहेगा, तो यहां कहां आयेंगे और त्योहार कैसे मनायेंगे. श्री आनंद ने झारखंड सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि राज्य में फिल्मी इंडस्ट्रीज को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि उनकी जल्द ही दो फिल्म अग्नि पथ व राजाजानी की शूटिंग शुरू होगी. पतरातू सहित पूरे झारखंड की वादियां फिल्म शूटिंग के लिए बेहतर जगह है.
अभिनय के लिए जाने जाते हैं आनंद : भोजपुरी कलाकार आनंद मोहन अभिनय के लिए भी जाने जाते हैं. आनंद मोहन बचपन से ही कला प्रेमी हैं. वर्ष 2000 में झारखंड अलग राज्य बना, तो आनंद मोहन अब खइहा शकरकंद, अलग भइल झारखंड गीत गाया था, यह गाना कई राज्यों में तहलका मचाया. भोजपुरी गायिका कल्पना के साथ गवनवा ले जा राजा जी में बूढ़े की आवाज की मिमिकिरी ने तो भोजपुरी के सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया था.
