हजारीबाग : सदर अस्पताल के चिकित्सक के कार्यशैली सरकारी चिकित्सा प्रावधान के विपरीत है. मंगलवार को यह देखने को उस वक्त मिला, जब एक मरीज इलाज के लिए सदर अस्पताल में दोपहर दो बजे पहुंचा. चिकित्सक डॉ अशोक कुमार सदर अस्पताल के वाह्य कक्ष में रोगियों का इलाज कर रहे थे. चिकित्सक और रोगी के इलाज की पूरी कार्यशैली कई अनियिमतिताओं से भरी रही. मरीजों को चिकित्सक बिचौलियों के हवाले किस तरह करते हैं, प्रस्तुत है कार्यशैली की आंखों देखा हाल.
हजारीबाग सदर अस्पताल में दोपहर दो बजे बुखार से पीड़ित 13 वर्षीय बालक तौसिक कुमार इलाज कराने पहुंचा. रोगी का पंजीयन नंबर 11093 दर्ज हुआ. उसने सरकारी शुल्क 10 रुपया जमा किया. चिट्ठा मिलने के बाद रोगी डॉ अशोक कुमार के चेंबर में गया. रोगी ने चिकित्सक कहा कि उसे बुखार है, लेकिन चिकित्सक ने रोगी को देखे बगैर लिख दिया कि मलेरिया व टायफाइड की जांच करायें. चिट्ठा मरीज के हाथ में नहीं देकर चिकित्सक ने एक आदमी को बुलाया और उसके हाथ में थमाते हुए जांच के लिए भेजा.
मरीज चिकित्सक के चेंबर से उस आदमी के पीछे-पीछे बाहर आया. वह आदमी अस्पताल के सामने एक प्राइवेट लैब का था. उस व्यक्ति ने मरीज से कहा कि तुम्हारा दोनों जांच हो जायेगा.
150 रुपये लगेंगे. रोगी के साथ गये परिजन ने कहा कि सदर अस्पताल में 75 रुपये में दोनों जांच हो जायेगी. हम यहां कराना चाहते हैं. इस पर वह व्यक्ति ने कहा कि सदर अस्पताल से रिपोर्ट शाम में मिलेगा, हम रिपोर्ट तुरंत देंगे. सदर अस्पताल में जांच ठीक नहीं होता है. परिजन ने जब अपना परिचय बिचौलिये को दिया तो बिचौलिये ने कहा कि यह चिट्ठा आप रखिये हम चलते हैं.
जांच में नहीं निकला टाइफाइड व मलेरिया: रोगी सदर अस्पताल जाकर 75 रुपये शुल्क देकर एसआरएल डाइग्नोस्टिक्स में मलेरिया और टायफाइड की उसकी जांच हुई, लेकिन जांच में मलेरिया और टायफाइड नहीं पाया गया.
चिट्ठा में भी नहीं लिखते हैं स्पष्ट:
चिकित्सक रोगी के चिट्ठे में दवा का नाम स्पष्ट नहीं लिखते हैं, ताकि रोगी दवा उस बिचौलिये की दुकान से ही ले सके. चिकित्सक की लिखावट बिचौलिया दुकानदार ही पढ़ सकता है.
पूछने पर क्या बोले चिकित्सक
जांच रिपोर्ट लेकर जब मरीज के परिजन चिकित्सक के पास गये, तो चिकित्सक ने कहा: आप जांच इसी अस्पताल से करायें. मरीज के परिजन ने जब चिकित्सक से कहा कि रिपोर्ट में गड़बड़ी क्या है, तब चिकित्सक ने जवाब दिया कि यहां पर डाइग्नोसिस सही नहीं होता है. इसलिए तो चिकित्सक अपने विवेक से बाहर जांच के लिए भेजते हैं, ताकि मरीजों का सही इलाज हो सके. आप खुद समझ सकते हैं.
सदर अस्पताल में मरीजों की जांच उच्चस्तरीय होती है. एसआरएल डाइग्नोस्टिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान एनएवीएल से मान्यता प्राप्त है. अस्पताल के कुछ चिकित्सक मरीजों को व्यक्तिगत स्वार्थ के मद्देनजर बाहर से जांच कराने को प्रेरित करते हैं. यह गलत है. ऐसे चिकित्सकों के विरुद्ध कोई सूचना मिलती है, तो इन पर कार्रवाई होगी.
डॉ विजय कुमार दास, सिविल सर्जन
