आदिवासी समाज की कोई लिखित पोथी नहीं, प्रकृति ही हमारी पोथी : मंत्री

प्रेस कॉन्फ्रेंस

डुमरी. आदिवासी समुदाय के पवित्र स्थल ककड़ोलता को राजकीय धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता देकर आदिवासी समाज की ऐतिहासिक आस्था को सम्मान दिया गया है. इसके लिए सीएम हेमंत सोरेन बधाई के पात्र हैं. उक्त बातें मंत्री चमरा लिंडा शुक्रवार को डुमरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही. उन्होंने कहा कि अब भी सरना धर्म की पहचान स्थापित करने के लिए सरना कोड जरूरी है. इस दिशा में सबसे पहला ठोस कदम झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा उठाया गया है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का सृष्टि स्थल है. इसका आदिवासी समाज की कोई लिखित पोथी नहीं है, बल्कि प्रकृति ही हमारी पोथी है. उन्होंने ककड़ोलता को आदिवासी समाज का सृष्टि स्थल बताते हुए कहा कि आदिवासी समाज में डंडा काटना पूजा में सूर्य, चंद्रमा, प्रकृति और मानव जीवन के क्रमिक विकास की व्याख्या है. कई वर्षों पूर्व लिखी गयी मान्यताओं के अनुसार उदय होते चंद्रमा को पवित्र माना गया. इस कारण प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी को चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है. उन्होंने नशापान को समाज की सबसे बड़ी बुराई बताते हुए कहा कि शैतान और धर्मेश देवता दोनों साथ पैदा हुए. लेकिन हमें शैतान को नष्ट करने का संकल्प लेना होगा. उन्होंने कहा कि धर्मकांडों के पूजा के माध्यम से समाज को कुरीति, बुराई व नशा से दूर रखने का संकल्प लेना चाहिए. उन्होंने सरना कोड की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में सरना धर्म की कोई आधिकारिक पहचान नहीं है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि 2027 में जनगणना होनी है. उससे पहले सरना कोड देना होगा. अगर नहीं दिया गया तो जनगणना नहीं होने दिया जायेगा और आंदोलन होगा. उन्होंने कहा कि देश के बड़े-बड़े पदाधिकारी व स्वयं प्रधानमंत्री को भी सरना कोड की जानकारी है. प्रधानमंत्री सरहुल पर्व और करम पर्व का उल्लेख किया जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में सरना कोड को स्वीकृति मिलेगी.

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