Jharkhand News : पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद झारखंड के लाल विजय सोरेंग का गांव आज भी उपेक्षित, बीडीओ ने दिया ये आश्वासन

Jharkhand News, Gumla News, बसिया न्यूज (कमलेश साहू) : जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में शहीद झारखंड के गुमला जिले के बसिया प्रखंड के फरसामा के लाल हवलदार विजय सोरेंग की शहादत के दो वर्ष पूरे हो गये, लेकिन आज भी शहीद का गांव उपेक्षित है. परिजनों ने कहा कि पहले कई घोषणाएं की गयीं, लेकिन वक्त के साथ सभी भूल गये. बीडीओ ने शहीद के गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया.

Jharkhand News, Gumla News, बसिया न्यूज (कमलेश साहू) : जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में शहीद झारखंड के गुमला जिले के बसिया प्रखंड के फरसामा के लाल हवलदार विजय सोरेंग की शहादत के दो वर्ष पूरे हो गये, लेकिन आज भी शहीद का गांव उपेक्षित है. परिजनों ने कहा कि पहले कई घोषणाएं की गयीं, लेकिन वक्त के साथ सभी भूल गये. बीडीओ ने शहीद के गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया.

गुमला के लाल शहीद विजय सोरेंग सीआरपीएफ 82वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे. विजय सोरेंग 1993 में सेना में भर्ती हुए थे. 1995 में एसपीजी में कमांडो दस्ते में थे. शहीद विजय सोरेंग की माता लक्ष्मी देवी एवं पिता ब्रिस सोरेंग को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है. ब्रिस सोरेंग ने बताया कि बेटे के शहीद हुए दो साल हो गये, परंतु अब भी विश्वास नहीं होता. आज भी ये महसूस होता है कि बेटा कहीं से वापस घर लौटेगा. उन्होंने कहा की मैं खुद फ़ौज की नौकरी से रिटायर हुआ हूं. देश की सेवा में बेटे के शहीद होने से खुद को फख्र हो रहा है.

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शहीद विजय सोरेंग की मां लक्ष्मी सोरेंग ने कहा कि बेटे से बिछड़ने का अफसोस है, पर गर्व है कि मेरा बेटा देश की सेवा में शहीद हुआ. शहीद विजय के भाई संजय सोरेंग ने कहा कि भाई के शहीद हुए दो वर्ष हो गये. लगता है, वह अभी भी ड्यूटी में तैनात हैं. उन्होंने कहा कि चूंकि भैया ड्यूटी के दौरान ही शहीद हो गये. इसलिए अभी भी विश्वास नहीं होता कि वे हमारे बीच नहीं हैं. शहीद विजय की पहली पत्नी कार्मेला बा रांची होटवार में झारखंड पुलिस महिला बटालियन में कार्यरत है, वहीं दूसरी पत्नी विमला अपने मायके सिमडेगा के कोचेडेगा में रहती है.

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पहली पत्नी से पुत्र 22 वर्षीय अरुण सोरेंग को सीआरपीएफ ने नौकरी का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन अरुण ने सरकार से सिविल में नौकरी की मांग की थी. इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पहल के लिए ज्ञापन सौपा है. वहीं शहीद विजय की दूसरी पत्नी से तीन बेटी और एक बेटा हैं. जिनमें बड़ी बेटी बरखा सोरेंग को जयपुर राजस्थान में रिलायंस कंपनी के द्वारा एवं बेटे राहुल सोरेंग को हरियाणा के झझर में सहवाग इंटरनेशनल कंपनी द्वारा पढ़ाया जा रहा है.

पिता ब्रिस सोरेंग ने बताया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद होकर अपने राज्य, जिले एवं गांव का नाम रोशन करने वाले मेरे बेटे शहीद विजय का गांव अभी भी उपेक्षित है. गांव में पेयजल की भारी समस्या है. यहां तक आने वाली सड़क भी काफी जर्जर है. प्रशासन से मांग रखी गयी थी कि कुम्हारी तालाब चौक को विजय चौक बना कर वहां शहीद की प्रतिमा लगायी जाये. शहीद के नाम से स्टेडियम का निर्माण एवं शहीद के घर तक आने वाली सड़क का निर्माण किया जाये. पर अब तक हमारी एक भी मांग पूरी नहीं हुई है. इस संबंध में बीडीओ रविंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि गांव में जल्द ही मुलभूत सुविधा पानी, सड़क सहित अन्य सरकारी सुविधा बहाल कर शहीद के गांव फरसामा को आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जायेगा.

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पिता ब्रिस सोरेंग ने बताया कि बेटे के शहीद होने के बाद रांची के एक फ्लैट निर्माता कंपनी ने परिजनों को रांची में एक फ्लैट देने की घोषणा की थी. इसके लिए हमें जमीन भी दिखाया गया था, पर अब तक फ्लैट नहीं दिया गया. वहीं दूसरी ओर बीसीसीएल ने 91 लाख रुपये देने की घोषणा की थी. उसे सिर्फ इस बात पर रोक दिया गया है कि परिवार में विवाद है, जबकि हमारे परिवार में कोई विवाद नहीं है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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