गुमला. राज्य के पांच जिलों में ओबीसी का आरक्षण शून्य कर दिया गया है. इससे ओबीसी समाज के लोगों में आक्रोश है. आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को ओबीसी समाज ने गुमला शहर में मशाल जुलूस निकाला. साथ ही 21 जनवरी को गुमला समेत राज्य के अन्य चार जिलों में होने वाले धरना प्रदर्शन की घोषणा की. धरना प्रदर्शन में भी ओबीसी समाज के लोगों ने शक्ति प्रदर्शन करने की कमर कस ली है. मशाल जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा व टावर चौक के समीप पहुंच नुक्कड़ सभा में तब्दील हो गया. सभा में वक्ताओं ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया. केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग ने कहा है कि सरकार ओबीसी को आरक्षण नहीं देती है, तो अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जायेगी. पांच जिलों में एक साजिश के तहत आरक्षण शून्य कर दिया गया है. आरक्षण के मुद्दे पर पांच जिलों के अंतर्गत पड़ने वाले सांसद व विधायक भी चुप हैं.
आंदोलन को राज्यव्यापी रूप देंगे : महासचिव
केंद्रीय महासचिव दिलीपनाथ साहू ने कहा है कि पांचों जिलों में ओबीसी समाज की औसत आबादी 40 से 50 प्रतिशत होने के बावजूद आरक्षण सीमित रहने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व लगभग समाप्त हो गया है. शिक्षा व रोजगार में हिस्सेदारी घट रही है. सरकारी योजनाओं का लाभ सीमित वर्गों तक सिमट कर रह गया है. सामाजिक असंतोष व आंदोलन की स्थिति बन रही है. पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति का कहना है कि यदि जल्द आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू नहीं किया गया, तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जायेगा.
ओबीसी की आबादी 50 प्रतिशत है : रमेश
रमेश कुमार चीनी ने कहा है कि गुमला जिले में ओबीसी समाज की आबादी लगभग 45 से 50 प्रतिशत आंकी जाती है. जबकि वर्तमान में नगर निकाय व अन्य संस्थाओं में ओबीसी के लिए आरक्षण मात्र दो से चार प्रतिशत तक सीमित है. आगामी नगर परिषद चुनाव में 22 वार्डों में केवल दो वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किये गये हैं. इससे बड़ी आबादी राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित हो रही है और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी नगण्य रह गयी है. इस प्रकार खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा व रांची जिला की स्थिति है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
