Gumla Road Condition, गुमला (दुर्जय पासवान): गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के लालमाटी गांव तक सड़क मार्ग के अभाव में एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी. इस कारण मरीज भिनसाई मुंडा (48) ने समय पर इलाज नहीं मिलने से दम तोड़ दिया. ग्रामीणों ने लकड़ी की बहंगी को ही एंबुलेंस बनाकर मरीज को कई घंटे तक पैदल चल कर पहाड़ी रास्ते से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देरी हो चुकी थी. अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया. दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण लालमाटी गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है. आज तक यहां सड़क मार्ग का निर्माण नहीं हो पाया है.
एंबुलेंस चालक ने पहाड़ी रास्ते में वाहन चढ़ाने पर जतायी असमर्थता
शनिवार की सुबह में अचानक भिनसाई मुंडा की तबीयत खराब हो गयी. ग्रामीणों ने 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया, लेकिन चालक ने पहाड़ी रास्ते पर एंबुलेंस चढ़ाने में असमर्थता जतायी. इसके बाद ग्रामीणों ने खुद मरीज को कंधों पर उठा कर करीब दो किमी तक पहाड़ी रास्ता पार किया. फिर वहां से 1500 रुपये में निजी वाहन कर मरीज को गुमला सदर अस्पताल लाया गया. लेकिन शाम करीब साढ़े चार बजे अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
सड़क होता तो समय पर पहुचाया जा सकता था अस्पताल
मृतक की पत्नी मांगो देवी ने कहा कि यदि गांव में सड़क बन गयी होती, तो उनके पति को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और शायद उनकी जान बच जाती. इधर मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव को गांव के मुहाने तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की. लेकिन सड़क नहीं होने से एंबुलेंस गांव के बाहर तक ही जा सकी. उसे बीच रास्ते में शव को उतार कर लौट जाना पड़ा. इसके बाद ग्रामीण शव को गांव में लेकर आये और अंतिम संस्कार किया.
क्या कहते हैं गांव के लोग
सड़क बनाने की मांग को लेकर लोकसभा व विधानसभा यहां तक कि गांव की सरकार के चुनाव का हमलोग बहिष्कार कर चुके हैं. प्रशासन हर समय सड़क बनाने का आश्वासन देता रहा. एक सप्ताह पहले भी गुमला उपायुक्त से मिल कर सड़क बनाने की मांग की. लेकिन सड़क बनेगी या नहीं. इसका नतीजा है कि हमारे गांव में जो बीमार पड़ रहा है. सड़क के अभाव में उनकी मौत हो रही है.
फलींद्र कोरवा, ग्रामीण
लालमाटी गांव के लोग लंबे समय से विकास का इंतजार कर रहे हैं. हम संकट में जी रहे हैं. इसकी जानकारी यहां के विधायक, डीसी समेत जिले के सभी अधिकारियों को है. इसके बाद भी गांव के विकास के लिए पहल नहीं हो रही है. आजादी के 75 साल बाद भी हमलोग आदिम युग में जी रहे हैं. लालमाटी गांव में विलुप्त प्राय जनजाति के अलावा आदिवासी समाज के लोग रहते हैं.
राजेश मुंडा, ग्रामीण
अगर गांव में सड़क रहती व गांव तक गाड़ी पहुंचती, तो आज मेरे चाचा भिनसाई मुंडा की मौत नहीं होती. सड़क के अभाव के कारण भिनसाई मुंडा की जान चली गयी. इससे पहले भी कई मरीजों की जान सड़क के कारण हो गयी. प्रशासन से अनुरोध है. हमारे गांव की सड़क को बनाने की पहल की जाये, ताकि बीमारी से मर रहे लोगों की जान बचायी जा सके.
बुद्धदेव मुंडा, मृतक का भतीजा
क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता
सोकराहातू से लालमाटी गांव तक सड़क बननी है. इस गांव में सड़क बनाने के लिए प्राक्कलन बन कर तैयार है. 10 किमी सड़क 13 करोड़ रुपये में बननी है. प्रशासनिक स्वीकृति के लिए ग्रामीण कार्य विभाग झारखंड रांची को भेजा गया है. लेकिन अबतक लालमाटी गांव की सड़क को स्वीकृति नहीं मिली है.
विकास कुमार, इइ, आरइओ
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