अंडमान-निकोबार में 30 वर्षों से फंसे हैं फुचा महली, गुमला आने के लिए नहीं है पैसे, बेटे ने जिला प्रशासन से मदद की लगायी गुहार

Jharkhand News (गुमला) : झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत गुमला प्रखंड के फोरी गांव निवासी फुचा महली (60 वर्ष) 30 वर्षों से अंडमान-निकोबार में फंसा हुआ है. जब वे 30 वर्ष के थे. तब रोजी-रोजगार की तलाश में अंडमान-निकोबार चले गये. अंडमान पहुंचने के बाद उन्हें आश्रय व खाने के लिए भोजन तो मिला, लेकिन मेहताना नहीं दिया गया. अभी भी वे एक घर में माली का काम कर रहे हैं. जहां उन्हें सिर्फ तीन वक्त का खाना व रहने के लिए एक कमरा मिला है.

Jharkhand News (गुमला) : झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत गुमला प्रखंड के फोरी गांव निवासी फुचा महली (60 वर्ष) 30 वर्षों से अंडमान-निकोबार में फंसा हुआ है. जब वे 30 वर्ष के थे. तब रोजी-रोजगार की तलाश में अंडमान-निकोबार चले गये. अंडमान पहुंचने के बाद उन्हें आश्रय व खाने के लिए भोजन तो मिला, लेकिन मेहताना नहीं दिया गया. अभी भी वे एक घर में माली का काम कर रहे हैं. जहां उन्हें सिर्फ तीन वक्त का खाना व रहने के लिए एक कमरा मिला है.

फुचा गुमला अपने परिवार के पास आना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पैसे नहीं है. जिससे वे गुमला आ सके. इधर, फुचा महली की पत्नी लुंदी देवी (58 वर्ष) वर्षों से उनके आने का इंतजार कर रही है. 30 वर्षों से वह अपने पति से नहीं मिली है. एक बार वह अपने पति को देखना चाहती है. उसके पैर धोना चाहती है.

वहीं, फुचा का बेटा सिकंदर महली भी अपने पिता को देखना चाहता है. उसे गले लगाना चाहता है. उसका हाथ पकड़ना चाहता है. सिकंदर ने कहा कि जब मैं एक साल का था. तभी मेरे पिता रोजी-रोजगार की तलाश में अंडमान-निकोबार चले गये. इसके बाद से वापस नहीं आये.

Also Read: झारखंड में मुर्गी शेड घोटाला, शेड बनाया भी नहीं और निकाल लिए पूरे पैसे, महिलाएं आक्रोशित

सिंकदर कहते हैं कि पिछले 30 वर्षों से पिता के आने का इंतजार कर रहा हूं. काफी खोजबीन के बाद पिता का पता चला है. उनसे फोन पर बात हुई है. मेरे पिता हमारे पास गुमला आना चाहते हैं, लेकिन हमलोग गरीब हैं. खेतीबारी कर किसी प्रकार जीविका चलाते हैं. हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम अंडमान-निकोबार जाकर अपने पिता को ला सके. बेटे ने गुमला प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है.

अंडमान में फुचा है, ऐसा पता चला

समाजसेवी सरोज महली ने प्रभात खबर कार्यालय को फोन कर बताया कि फोरी गांव का फुचा महली जो अब वृद्ध हो चुके हैं. वे अंडमान-निकोबार में फंसे हुए हैं. वे गुमला आना चाहते हैं, लेकिन गरीबी व आर्थिक तंगी फुचा को उसके परिवार से मिलने में बाधा बनी हुई है.

अंडमान-निकोबार में रहने वाले विनोद कुमार से संपर्क करने से पता चला कि फोरी निवासी फुचा महली अंडमान-निकोबार में हैं. विनोद महली ने फोन पर बताया कि फुचा महली एक घर में माली का काम कर रहे हैं. वे अब वृद्ध हो चुके हैं. उनका पहचान पत्र व आधार कार्ड अंडमान-निकोबार का ही बन गया है, लेकिन अब वे अपने घर गुमला जाना चाहते हैं.

Also Read: स्टेट हाइ-वे अथॉरिटी ने वन विभाग गुमला को पौधरोपण के लिए दिये 45.63 लाख रुपये, चार वर्षों में काटे गये 2321 पेड़

Posted By : Samir Ranjan.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >