साइन बोर्ड ने बढ़ाई राहगीरों की परेशानी, सही रास्ते के बजाय भटक रहे वाहन चालक

डुमरी के नवाडीह और टांगीनाथ धाम मोड़ पर लगे गलत साइन बोर्ड के कारण राहगीर भ्रमित हो रहे हैं. स्थानीय लोगों ने विभाग से इसे जल्द ठीक करने की मांग की है.

डुमरी. प्रखंड क्षेत्र के क्रूस चौक नवाडीह और टांगीनाथ धाम मोड़ के पास लगे साइन बोर्ड इन दिनों राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं. बोर्ड पर दिशाओं के संकेत स्पष्ट नहीं होने से वाहन चालकों को सही मार्ग चुनने में दिक्कत हो रही है. खासकर दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले वाहन चालक बोर्ड देखकर भ्रमित हो रहे हैं और कई बार गंतव्य के बजाय दूसरे रास्ते पर चले जा रहे हैं.

बोर्ड पर दिशा और सड़क में तालमेल नहीं

नवाडीह चौक और टांगीनाथ धाम मोड़ के पास विभिन्न मार्गों के लिए दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गये हैं. इनमें टांगीनाथ धाम, अंबिकापुर, नेतरहाट और महुआडांड़ की ओर जाने वाले रास्तों की जानकारी दी गयी है. लेकिन बोर्ड पर बने संकेत और वास्तविक सड़क मार्ग में तालमेल नहीं होने से लोगों को सही दिशा समझने में परेशानी हो रही है.

कई किलोमीटर आगे जाने के बाद पता चलती है गलती

स्थानीय लोगों के अनुसार अनजान वाहन चालक बोर्ड पर भरोसा कर गलत रास्ते पर चले जाते हैं. कई बार उन्हें काफी दूर जाने के बाद अपनी गलती का पता चलता है. इसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ता है. इससे यात्रियों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं.

पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है मार्ग

ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग पर्यटन और आवागमन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. टांगीनाथ धाम के अलावा कुरुंद घाट, नेतरहाट, डालटेनगंज और अंबिकापुर जाने वाले लोगों की भी इस मार्ग से आवाजाही होती है. ऐसे में दिशा-सूचक बोर्ड की गलत जानकारी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है.

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ग्रामीणों ने की बोर्ड बदलने की मांग

ग्रामीणों और वाहन चालकों ने संबंधित विभाग से साइन बोर्ड की जल्द जांच कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि पुराने या गलत संकेत वाले बोर्ड को हटाकर स्पष्ट और सही दिशा बताने वाले बोर्ड लगाए जाएं, ताकि बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशानी न हो.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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