वर्ष 2016 दया व करुणा का वर्ष घोषित था, जिसके समापन के बाद गुमला धर्मप्रांत में वर्ष 2017 परिवार के नाम होगा. परिवार को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम होंगे.
गुमला : रोम के संत पापा के निर्देश पर वर्ष 2016 में गुमला धर्मप्रांत को घोषित दया व करुणा के वर्ष का समापन मंगलवार को किया गया. गुमला धर्मप्रांत के बिशप पॉल लकड़ा ने प्रतीक के रूप में संत पात्रिक महागिरजाघर, गुमला के दरवाजा को बंद कर दया व करुणा वर्ष का समापन किया. वहीं वर्ष 2017 को पारिवारिक वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की. मौके पर महागिरजाघर में मिस्सा पूजा हुई. इसके मुख्य अधिष्ठाता गुमला धर्मप्रांत के बिशप पॉल लकड़ा थे, जबकि सहयोगी के रूप में विकर जनरल फादर सीप्रियन कुल्लू, फादर जेवियर एक्का व फादर सुशील थे, जिनकी अगुवाई में संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान हुए.
बिशप पॉल ने अपने संदेश में कहा कि आठ दिसंबर 2015 से वर्ष 2016 के ख्रीस्त राजा पर्व तक दया व करुणा का वर्ष घोषित था. इस एक वर्ष में गुमला धर्मप्रांत की सभी 38 पल्लियों में कई कार्यक्रम हुए.
पुरोहित व धर्मबहनों के अलावा कैथोलिक संघ ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. बिशप ने कहा : रोम से संत पापा ने दया व करुणा वर्ष की घोषणा की थी. उस समय महागिरजाघर के दरवाजा को खोल कर इसकी शुरुआत की गयी थी. आज प्रतीक के रूप में खोले गये दरवाजा को पुन: बंद कर करुणा वर्ष का समापन किया गया. हम दया व करुणा के महत्व को समझते हुए उग्रवाद, हिंसा से दूर रहे. समाज को प्रेम के मार्ग पर ले चले.
गुमला धर्मप्रांत में दया व करुणा फैलाने के लिए पुरोहित व धर्मबहनों ने जो काम किया है, वह अनुकरणीय है. उन्होंने पारिवारिक वर्ष पर धर्मप्रांत के सभी लोगों से कहा कि हम सभी परिवार के साथ रहें. ईश्वर के बताये जीवन को जीयें. प्रभु की दया व करुणा को हम स्वीकार करें. प्रेम, दया व करुणा को अपनायें. दूसरे के अपराध को क्षमा करें. वर्ष 2017 को हम अच्छी तरह जीयें. हमारा जीवन अनमोल है. हम किसी को दुख न दें. प्रयास करें, सभी खुशहाल रहें. खास कर अपने परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. कार्यक्रम में गुमला धर्मप्रांत के सभी 38 चर्च के पुरोहित व धर्मबहनें मौजूद थीं.
