रामेश्वर उरांव ने सीएस को फोन कर मच्छरदानी बांटने के लिए कहा.
गुमला : अनुसूचित जनजाति आयोग नयी दिल्ली के पूर्व चेयरमैन डॉ रामेश्वर उरांव गुमला पहुंचे. उन्होंने गुमला सिविज सर्जन डॉ जेपी सांगा को आदिम जनजाति गांवों में निवास करने वाले लोगों के बीच मच्छरदानी वितरण करने को कहा. श्री उरांव ने सीएस को फोन कर कहा कि आदिम जनजाति के लोगों को अभी तक मच्छरदानी नहीं मिला है़, जिससे पहाड़ों पर रहने वाले लोग मच्छर काटने से मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं. इसपर सीएस ने कहा कि मच्छरदानी का वितरण हो रहा है़ जिन गांवों में मच्छरदानी नहीं बंटा है़, उन गांवों में जल्द मच्छरदानी का वितरण कर लिया जायेगा़ डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि बिशुनपुर, डुमरी, घाघरा, चैनपुर व जारी प्रखंड के पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को अभी तक दवायुक्त मच्छरदानी नहीं मिला है़ बिशुनपुर व घाघरा में आधा दर्जन लोगों की मौत मलेरिया से हो गयी है़
इधर, बिशुनपुर के आदिम जनजाति नेता अनिल असुर ने डॉ रामेश्वर उरांव से मुलाकात कर कहा कि हमारे आदिम जनजाति बहुल गांवों का अभी तक विकास नहीं हो सका है़ गांवों में पीने का स्वच्छ पानी नहीं है़ आज भी लोग खुले में शौच जाते हैं. गांवों में सड़क नहीं है़ इसपर डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आदिम जनजाति गांवों में मूलभूत सुविधा मुहैया कराने में सरकार विफल है़
समय पर प्रमाण पत्र नहीं बनता है : आदिम जनजाति के लोगों ने डॉ रामेश्वर उरांव से कहा है कि हम पहाड़ों व जंगलों में रहते हैं. विद्यार्थी जाति, आय व आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रखंड मुख्यालय आते हैं, लेकिन कई बार देखा जाता है कि ब्लॉक व अंचल से प्रमाण पत्र नहीं बन पाता़ इस कारण लड़कियों को घर आने-जाने में परेशानी होती है़
पठारी क्षेत्र में गाड़ी नहीं चलती है़ लड़कियां जब मुख्यालय में रूकती हैं, तो भय बना रहता है. इस संबंध में डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि यह गंभीर मामला है़ इस संबंध में मैं गुमला डीसी से बात करूंगा़ दूर दराज से आने वाले लोगों का जाति, आय व आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने की व्यवस्था करने के लिए कहेंगे.
