उपायुक्त ने जागरूकता रथ को रवाना किया
गुमला : डायन प्रथा प्रगतिशील समाज के लिए अभिशाप है. इस प्रथा के चंगुल में फंस कर कई लोग अंधविश्वासी हो जाते हैं. कइयों की जान तक चली जाती है और कई बच्चे अनाथ व बेसहारा हो जाते हैं. जनहित को ध्यान में रखते हुए जिला समाज कल्याण विभाग गुमला द्वारा निकाले गये जागरूकता रथ को रवाना करने के बाद ये बातें उपायुक्त श्रवण साय ने कही.
उपायुक्त ने कहा कि समाज से इस अभिशाप को मिटाने के लिए संकल्प लेने की जरूरत है. समाज में फैली इस कुप्रथा के कारण समाज अंधविश्वास के दलदल में फंस रहा है. हमें संयुक्त रूप से इस दलदल को दूर कर एक स्वच्छ व सुंदर समाज का निर्माण करना है, लेकिन यह तभी संभव होगा, जब लोग जागरूक होंगे. इसके लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा निकाला गया जागरूकता रथ सराहनीय पहल है. उपायुक्त ने कहा कि डायन प्रथा एक अंधविश्वास है. किसी को भी डायन कह कर उस पर अत्याचार न करें. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड के ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2008 के बाद से 768 महिलाओं की हत्या डायन कह कर की गयी है, जो डायन प्रथा के प्रति समाज में फैले अंधविश्वास को दर्शाता है.
डायन कह कर प्रताड़ित अथवा हत्या करने वाले पर भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 302, 320, 323, 351, 354, 364ए, 503 और 506 के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है. उपविकास आयुक्त नागेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि समाज में फैली डायन प्रथा समाज के विकास के लिए एक तरह से बाधक है. इस प्रथा को समाज से हर हाल में मिटाना है.
इसके लिए लोगों में जागरूकता की जरूरत है. प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी मीनाक्षी भगत ने कहा कि डायन प्रथा एक अंधविश्वास है. महिलाओं को डायन कहना अथवा मानना अपराध है. मीनाक्षी भगत ने बताया कि जागरूकता रथ पूरे जिले में तीन माह तक घूम घूम कर अंधविश्वास से बचने के लिए लोगों को प्रेरित करेगा. इस दौरान नुक्कड़ नाटक भी किया जायेगा.
