असर. अवैध रूप से बालू उठाव की खबर छपते ही हरकत में आयीं सीओ
नागफेनी नदी से अवैध बालू उठाव के मामले में सीओ निशा सिंह ने थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है़ इसमें गुमला के सहायक खनन पदाधिकारी विशेश्वर राम, बसंत साहू, प्रेम साहू व धनपति सिंह को आरोपी बनाया गया है़
गुमला : सिसई प्रखंड के नागफेनी कोयल नदी से अवैध रूप से बालू उठाव व भंडारण के मामले में गुरुवार को सीओ निशा कुमारी सिंह ने थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. इसमें गुमला के सहायक खनन पदाधिकारी विशेश्वर राम, अवैध रूप से उत्खनन व परिवहन कराने वाले बसंत साहू, प्रेम साहू व धनपति सिंह को आरोपी बनाया गया है. इन पर झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली-2004 व झारखंड खनिज परिवहन पारगमण चालान विनियमन-2005 के उल्लंघन के अलावा सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया गया है.
ज्ञात हो कि नागफेनी नदी से अवैध रूप से बालू उठाव की शिकायत के बाद डीसी श्रवण साय ने नदी से बालू उठाव की जांच करायी थी. जांच में मामला सही पाया गया. इसके बाद डीसी ने सिसई अंचल की सीओ को प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था, लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी हो रही थी. इस समाचार को प्रभात खबर ने गुरुवार के अंक में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया़ समाचार छपने के बाद सीओ हरकत में आयी. उन्होंने गुरुवार को दोपहर में थाना पहुंच कर प्राथमिकी दर्ज करायी.
झूठ बोल कर फंसे खनन पदाधिकारी
प्राथमिकी में कहा गया है कि सहायक खनन पदाधिकारी विशेश्वर राम ने (ज्ञापांक 98/एम, दिनांक चार फरवरी 2016 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी गुमला को प्रतिवेदित करते हुए) उक्त बंदोबस्त बालूघाट से अवैध बालू ढुलाई की बात से इनकार किया था. विशेश्वर राम ने कहा था कि बालू का अवैध उठाव नहीं हो रहा है, लेकिन जब एसडीओ ने जांच की, तो वहां अवैध रूप से बालू ढुलाई होते पाया.
इसके बाद उन्होंने जांच प्रतिवेदन में कहा था कि नागफेनी नदी में बंदोबस्त क्षेत्र के अलावा नदी के संपूर्ण क्षेत्र में बालू का उठाव हो रहा है. नदी से बालू निकाल कर मुरगू व आसपास के क्षेत्रों में गलत तरीके से भंडारण भी किया गया है. खनन पदाधिकारी झूठ बोलकर खुद फंस गये, इसलिए लीजधारकों के साथ उनके ऊपर भी केस किया गया.
इस प्रकार सामने आया था मामला
नागफेनी नदी से अवैध रूप से बालू उठाया जा रहा है. इसकी शिकायत कुछ लोगों ने सीएम जनसंवाद में की थी. इसके बाद सीएम ने गुमला डीसी से मामले की जांच करने के लिए कहा था. सीएम के निर्देश के बाद डीसी ने एक जांच टीम बनायी थी. इसमें एसडीओ केके राजहंस, कार्यपालक पदाधिकारी रवि शंकर थे. अधिकारियों ने नदी पहुंच कर जांच की, तो पाया कि जहां प्रतिबंधित था, वहीं से बालू का उठाव किया गया है. इससे नदी का जलस्तर तेजी से घट गया.
मार्गदर्शन लेकर किया है केस : सीओ
सीओ निशा कुमारी सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद कहा : कुछ तकनीकी कारणों से एफआइआर करने में देरी हुई है. मैंने एफआइआर करने से पहले एसी व एसडीओ से मार्गदर्शन मांगा.
इसके बाद बुधवार को एफआइआर करने थाना गयी थी, लेकिन थानेदार ने यह कह कर एफआइआर नहीं किया कि इसमें ऑरिजनल कॉपी नहीं है. मेरे द्वारा केस करने में कोई देरी नहीं की गयी है. मजिस्ट्रेट होने के नाते थाने को तुरंत एफआइआर लेना था, लेकिन थानेदार ने केस करने में देरी की.
