गुमला : गुमला शहर की 51 हजार आबादी पानी खोज रही है. कारण, जलापूर्ति योजना ठप हो गयी है. खटवा नदी से जलापूर्ति दो माह से ठप है. पेयजल विभाग की मानें, तो खटवा नदी से बालू की चोरी कर ली गयी है. नदी को खोद कर सभी बालू निकाल लिया गया. नदी में अब घास उग आयी है. नदी में मिट्टी जमा हो गयी है.
जिस कारण पानी का ठहराव नहीं हो रहा है. नदी में बनाया गया इंटक वेल में पानी खत्म हो गया है. इस कारण शहर में पानी की सप्लाई बंद कर दी गयी. यहां तक कि खटवा जलापूर्ति केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है. गुमला शहर में नागफेनी से भी पानी सप्लाई होती है, लेकिन पांच दिन से यहां भी पंप मशीन खराब है, जिस कारण गुमला में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है.
नदी खोद बालू निकाल लिया : खटवा नदी में 1973-74 में जलापूर्ति केंद्र बना था. पूरे शहर के लोग खटवा नदी का पानी पीते थे, लेकिन बीते पांच साल से खटवा जलापूर्ति केंद्र का हाल ठीक नहीं है. नदी से घट रहे बालू के कारण नदी का अस्तित्व खत्म हो गया. 1977 से काम कर रहे तिवारी उरांव ने बताया कि चार से पांच फीट गड्ढा खोद कर नदी का बालू निकाल लिया गया. अब नदी में बालू की जगह घास व मिट्टी बच गयी है.
कुएं का पानी दस फीट सूखा : अभी गुमला शहर को नागफेनी से पानी सप्लाई होती है, लेकिन नदी सूख गयी है. ऊपर से यहां की पंप मशीन भी खराब है. पीएचइडी की मानें, तो नागफेनी नदी में बनाया गया इंटक वेल का पानी दस फीट सूख गया है. हालांकि अभी भी इंटक वेल में दस फीट तक पानी है. अगर यह पानी सूख गया, तो स्थिति भयावह हो सकती है.
लाइफ लाइन नदियां भी सूखी: गुमला की लाइन लाइन सभी नदियां सूख गयी है. दक्षिणी कोयल, शंख, लावा, बासा, कांजी, मरदा, पारस, खटवा, बहरी नदी सूख गयी है. कहीं कहीं बूंद भर पानी है. इन नदियों के किनारे बसे गांव के लोग नदी में चुआं खोद कर पानी पीते हैं, लेकिन नदी सूखने के बाद स्थिति भयावह होगयी है.
