हिंसा नहीं, अहिंसा के मार्ग पर चलें

टाना भगतों का सत्याग्रह आंदोलन शुरू, पद्मश्री अशोक भगत ने कहा बिशुनपुर(गुमला) : सरकार से हक व अधिकार की मांग को लेकर महात्मा गांधी के अनुयायी टाना भगतों ने शनिवार से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया है. स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत की जन्म स्थली बिशुनपुर प्रखंड के चेंगरी गांव में सभी टाना भगत सत्याग्रह पर […]

टाना भगतों का सत्याग्रह आंदोलन शुरू, पद्मश्री अशोक भगत ने कहा
बिशुनपुर(गुमला) : सरकार से हक व अधिकार की मांग को लेकर महात्मा गांधी के अनुयायी टाना भगतों ने शनिवार से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया है. स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत की जन्म स्थली बिशुनपुर प्रखंड के चेंगरी गांव में सभी टाना भगत सत्याग्रह पर बैठे हैं.
मौके पर विकास भारती के सचिव सह पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि आज महात्मा गांधी का शहादत दिवस है. आज से टाना भगत सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर रहे हैं.
जब तक सरकार टाना भगतों की समस्या का समाधान नहीं करती है, तब तक सत्याग्रह चलेगा. इस दौरान सरकार से वार्ता भी करने का प्रयास होगा, जिससे टाना भगतों की समस्या का समाधान हो सके. समस्या के समाधान के लिए हथियार व हिंसा जरूरी नहीं है. महात्मा गांधी की तरह सत्याग्रह आंदोलन से भी हम अपनी मांग को मनवा सकते हैं. हमें हिंसा नहीं, अहिंसा के मार्ग पर चलना है.
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी की तसवीर व जतरा टाना भगत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया.
श्री भगत ने कहा कि टाना भगतों ने सदा अहिंसा, सच्चाई, स्वावलंबन व धर्म का मार्ग अपनाया है. सत्याग्रह कर के झारखंड में राष्ट्रीय आंदोलन को एक ताकत दी. इस आंदोलन के क्रम में 1930 में टाना भगतों की जमीन छीन ली गयी थी. उस समय टाना भगतों के समक्ष समस्याएं खड़ी हो गयी थीं. वे कभी हताश नहीं हुए. अपने हक व अधिकार की मांग को लेकर आज भी आंदोलनरत हैं.
श्री भगत ने कहा कि झारखंड एक हिंसाग्रस्त राज्य है, इसे टाना भगत ही अहिंसा के मार्ग पर ले जा सकते हैं. झारखंड सरकार जिस तरह अदिवासियों की जमीन पर संवेदनशील दिख रही है, उसी प्रकार टाना भगतों की जमीन भी वापस मिलनी चाहिए. कई सरकारें आयी व गयी, परंतु टाना भगतों को केवल वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया गया. उनकी समस्याओं का समाधान आज तक नहीं हो पाया.
झारखंड में अभी एक स्थिर व संवेदनशील सरकार है, जिससे टाना भगतों के अंदर एक उमीद जगी है. मौके पर महेंद्र भगत, अजीत उरांव, बलकू टाना भगत, जवरा, भिखारी टाना भगत, पति टाना भगत, लाल टाना भगत, जनक टाना भगत सहित सैकड़ों कई लोग उपस्थित थे.

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