रहते हैं शहर में, चुनाव लड़ रहे गांव कीगुमला. गांवों में पंचायत चुनाव की खुमार परवान पर है. प्रथम चरण में गुमला व पालकोट में चुनाव है. इसकी पूरी तैयारी हो गयी है. इस बार पंचायत चुनाव में कई ऐसे उम्मीदवार हैं. जिनका ठिकाना शहर में है. रहना व खाना-पीना सभी शहर में होता है. उम्मीदवारों के बच्चे भी शहर के अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं. लेकिन वे लोग चुनाव गांव की लड़ रहे हैं. गुमला जिले में देखा गया है. जो उम्मीदवार शहर में रहकर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें गांव की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रहता है. क्योंकि वे गांव ज्यादा घूमते नहीं है. लेकिन चुनाव में वे गांवों की समस्या दूर करने का वादा कर रहे हैं. पूर्व के पांच वर्षो के कामों को देखे, तो जिला परिषद के लोग अपने कामों में विफल रहे हैं. वे लोग शहर में रहकर गांवों के विकास की बात करते रहे. लेकिन कहीं काम नजर नहीं आया. उदाहरण के पंचायत भवन का निर्माण. जिले के 159 पंचायत में अभी भी कई पंचायतों में भवन अधूरा है. इसलिए इसबार जनता भांप रही है. वैसे ही उम्मीदवारों को वोट देने का मन बना रहे हैं, जो गांवों की हर गली का हाल जानते हैं.
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रहते हैं शहर में, चुनाव लड़ रहे गांव कीगुमला. गांवों में पंचायत चुनाव की खुमार परवान पर है. प्रथम चरण में गुमला व पालकोट में चुनाव है. इसकी पूरी तैयारी हो गयी है. इस बार पंचायत चुनाव में कई ऐसे उम्मीदवार हैं. जिनका ठिकाना शहर में है. रहना व खाना-पीना सभी शहर में होता है. […]
