जतरा संस्कृति व सभ्यता की पहचान : नीरू फोटो (2) महिलाअों के साथ झूमर खेलती नीरू शांति भगत.कुड़ू (लोहरदगा). प्रखंड के कोलसिमरी में आयोजित ऐतिहासिक कोलसिमरी जतरा संपन्न हो गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीरू शांति भगत ने कहा कि जतरा आदवासी सभ्यता व संस्कृति की पहचान है. ऐतिहासिक धरोहरों में पहला स्थान जतरा को मिला है. बस उसे संवारने की जरूरत है. जतरा के के माध्यम से संदेश दिया जाता है कि हमारी परंपरा पुरानी है. मांदर-नगाड़े की आवाज वादियों में शांति का संदेश देती है.झूमर नृत्य में हुई शामिल: कोलसिमरी जतरा में कुड़ू प्रखंड़ के साथ-साथ कैरो, लोहरदगा, किस्को, भंडरा, सेन्हा, चंदवा, चान्हो प्रखंड के आदिवासी अखाड़े पहुंचे थे. आदवासी परंपरा के अनुसार मांदर व नगाड़े की थाप पर महिलाएं नृत्य कर रही थी. नीरू शांति भगत मंच को छोड़ कर अचानक नृत्य कर रही महिलाअों के साथ जा मिली व जोड़ी बना कर झूमर नृत्य में झूमने लगी. इस नजारे को देख वहां मौजूद लोग तालियां बजाते हुए झूमने लगे. मौके पर गांव के पहान, पुजार, मेला, जतरा आयोजन समिति, आजसू नेता ओम प्रकाश भारती, कलीम खान, मुन्ना अग्रवाल, जतरू भगत, मो शकील, सोमा उरांव, विजय उरांव, परमेश्वर महतो, कबीर अंसारी, संजय महली, वीरेंद्र भगत, अश्वनी, निवर्तमान मुखिया मुन्नी भगत, सुदर्शन भगत समेत अन्य मौजूद थे.
जतरा संस्कृति व सभ्यता की पहचान : नीरू
जतरा संस्कृति व सभ्यता की पहचान : नीरू फोटो (2) महिलाअों के साथ झूमर खेलती नीरू शांति भगत.कुड़ू (लोहरदगा). प्रखंड के कोलसिमरी में आयोजित ऐतिहासिक कोलसिमरी जतरा संपन्न हो गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीरू शांति भगत ने कहा कि जतरा आदवासी सभ्यता व संस्कृति की पहचान है. ऐतिहासिक धरोहरों में पहला स्थान जतरा को […]
