जी... नहीं बदली तसवीर, विकास की आस

जी… नहीं बदली तसवीर, विकास की आस ग्राउंड रिपोर्ट हाल : विमरला, दीरगांव व रूकी पंचायत का25 गुम 13 में विमरला व दीरगांव जाने वाली सड़क25 गुम 14 में विमरला में अधूरा पड़ा पंचायत भवनजौली/अजीत, गुमला/घाघराघाघरा प्रखंड के दीरगांव, विमरला व रूकी पंचायत उग्रवादी इलाका है. उग्रवाद के कारण ही इन तीनों पंचायत का विकास […]

जी… नहीं बदली तसवीर, विकास की आस ग्राउंड रिपोर्ट हाल : विमरला, दीरगांव व रूकी पंचायत का25 गुम 13 में विमरला व दीरगांव जाने वाली सड़क25 गुम 14 में विमरला में अधूरा पड़ा पंचायत भवनजौली/अजीत, गुमला/घाघराघाघरा प्रखंड के दीरगांव, विमरला व रूकी पंचायत उग्रवादी इलाका है. उग्रवाद के कारण ही इन तीनों पंचायत का विकास अभी तक नहीं हुआ है. चारों ओर पहाड़ों व जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारी भी जाने से कतराते हैं. यह घाघरा से 32 किमी दूर है. तीनों पंचायत की आबादी 15, 495 है. इन गांवों का आजादी के 68 साल बाद भी विकास नहीं हुआ है. पानी, बिजली, सड़क, रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य की समस्या है. क्षेत्र का विकास नहीं होने के कारण ही इस इलाके के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया है. यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी घुसने नहीं देने का फरमान जारी किया है. ग्रामीणों की माने तो शाम ढलते ही उग्रवादियों का राज शुरू हो जाता है. पंचायत भवन अभी भी अधूरा: पंचायत भवन अभी तक अधूरा है. इस कारण पंचायत के कार्यो की जानकारी लोगों को नहीं मिल पाती है. उच्च शिक्षा का आभाव है. विमरला के दाउद किंडो क्षेत्र का विकास नहीं होने से नाराज है. उन्होंने कहा कि जनता के साथ धोखा हो रहा है.खटिया में अस्पताल जाते हैं: स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. बीमार पड़े, तो झोला छाप डॉक्टर ही सहारा है. कोई बीमार होता है या गर्भवती तो उसे खटिया में लादकर अस्पताल लाया जाता है. क्योंकि सड़क खराब है. गांव तक गाड़ी नहीं जाती है. खराब सड़क के कारण बीच रास्ते पर ही कई बार शिशु का जन्म हुआ है.कंद मूल पर जीवन आश्रित: राजेंद्र असुर व शनिचर असुर ने कहा कि विमरला व दीरगांव पंचायत की एक बड़ी आबादी कंद मूल पर आश्रित है. कोई काम नहीं मिलता और खाने के लिए भोजन नहीं रहता है, तो लोग कंद मूल से भूख मिटाते हैं. सरकार ने हमें छला है: बीरबल भगत ने कहा है कि सरकार ने हमें क्या दिया है. हम गरीबों का हक मारते रही है. सांसद व विधायक सिर्फ चुनाव के समय वोट लेते हैं. विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ. पंचायत चुनाव के पांच साल में कुछ काम नहीं हुआ है.

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