रायडीह (गुमला) : रायडीह ब्लॉक को चैनपुर से हटा कर गुमला अनुमंडल में शामिल करने की मांग को लेकर लोगों ने बुधवार को एकता का परिचय दिया. हर उम्र के लोग सड़क पर उतरे. महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी. लोग नेशनल हाइवे में ही र्दी बिछा कर बैठ गये. हर एक वाहन के आवागमन पर रोक लगा दिया.
एंबुलेंस व प्रेस वाहन तक को पार करने नहीं दिया गया. इस आंदोलन को सभी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त हुआ. यहां तक कि सरकार के अभिन्न अंग झामुमो भी रायडीह के लोगों के साथ दिखा. झामुमो के जिलाध्यक्ष भूषण तिर्की चक्का जाम में भाग लिये. इस आंदोलन का भाजपा, कांग्रेस, भाकपा माले, आजसू पार्टी व झाविमो का पहले से समर्थन था. जनसंघर्ष समिति के बैनर तले जब सुबह छह बजे लोग सड़क पर उतरे. जैसे जैसे दिन ढलता गया, हजारों लोग सड़क पर जमा हो गये.
लोगों के गुस्सा व चक्का जाम से राहगीरों की परेशानी हुई. जिला प्रशासन हरकत में आयी. दिन के 11 बजे डीडीसी अंजनी कुमार जाम स्थल पहुंचे. काफी मनाने के बाद दिन के 11.30 बजे लोग चक्का जाम से हटने को तैयार हुए. आंदोलनकारियों ने शर्त रखी कि 15 अगस्त तक अगर रायडीह को चैनपुर अनुमंडल से अलग करने की अधिसूचना जारी नहीं की जाती है, तो रायडीह प्रखंड के 70 हजार आबादी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी. रायडीह से लेकर जिला व राजधानी रांची तक आंदोलन होगा. इस आंदोलन के दौरान अगर कुछ होता है तो इसकी जिम्मेवारी प्रशासन व सरकार की होगी. बंद के समर्थन में बुधवार को कोंडरा में लगने वाला साप्ताहिक बाजार भी नहीं लगा.
बंद कराने में शामिल प्रमुख लोगों के नाम : जिप सदस्य रश्मि मिंज, भाजपा जिला अध्यक्ष विजय मिश्र, प्रमुख यशोदा देवी, इस्माइल कुजूर, बसंत कुमार लाल, वीरेंद्र उरांव, सिलबिरयुस मिंज, सुशांति कुजूर, रंजीत एक्का, सुनीता देवी, तारामुनी सोरेन, पारसनाथ उरांव, बिसनी उरांव, गीता देवी, संत कुमार, प्रमोद प्रसाद, रूकमनी देवी, रंजीत उरांव, मिसिर कुजूर, नरसिंह होता, केदार प्रसाद, चुमनू उरांव, शक्ति साहू, जगनारायण सिंह, बहादुर सिंह, गजाधर सिंह, रंजीत सिंह सरदार, आरिफ अंसारी, शंकर पांडेय, जगदीश सिंह, रामजतन साहू, कुदूस राय, मुक्तेश्वर सिंह, लीलावती टोप्पो, विश्वनाथ उरांव, कादिर खान, देवंती उरांव, मांगू उरांव, बलभद्र साहू, महावीर सिंह आदि उपस्थित थे.
