अच्छी सड़क से ही होगा कुरूमगढ़ का कायाकल्प

कुरूमगढ़ से लौटकर 4दुर्जय पासवान चैनपुर प्रखंड मुख्यालय से कुरूमगढ़ तक सड़क जानलेवा है. ग्रामीणों का कहना है अगर सड़क बन जाये, तो कुरूमगढ़ का कायाकल्प हो जायेगा, क्योंकि जर्जर सड़क के कारण ही इस क्षेत्र का विकास रुका हुआ है. जबकि कुरूमगढ़ व आसपास के गांवों की जो बनावट है, वह सुंदर वादियों से […]

कुरूमगढ़ से लौटकर 4दुर्जय पासवान
चैनपुर प्रखंड मुख्यालय से कुरूमगढ़ तक सड़क जानलेवा है. ग्रामीणों का कहना है अगर सड़क बन जाये, तो कुरूमगढ़ का कायाकल्प हो जायेगा, क्योंकि जर्जर सड़क के कारण ही इस क्षेत्र का विकास रुका हुआ है. जबकि कुरूमगढ़ व आसपास के गांवों की जो बनावट है, वह सुंदर वादियों से घिरा हुआ है, लेकिन सरकार का ध्यान नहीं है. यही कारण है कि आजादी के 70 साल बाद भी यह क्षेत्र विकास को तरस रहा है. ग्रामीणों ने सरकार से कहा है, अगर वर्ष 2019 के चुनाव के पहले सड़क नहीं बनी, तो इसबार वोट भी नहीं डालेंगे.
ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. सड़क की जर्जर हालत है. जगह-जगह गड्ढे हैं. नुकीले पत्थर भी निकले हुए हैं. जानलेवा सड़क है. सरकार ने घोषणा की थी कि उरू बारडीह गांव के शहीद नायमन कुजूर के नाम से सड़क बनेगी, लेकिन अभी तक सिर्फ सरकार की घोषणाओं में सड़क है. पहले से यह क्षेत्र नक्सल के कारण बदनाम है. ऊपर से अच्छी सड़क नहीं रहने से इस क्षेत्र में लोग कोई जाना नहीं चाहता है. ग्रामीण कहते हैं: सड़क बन जायेगी, तो कम से कम हम तो सुरक्षित सफर कर सकेंगे. बस उम्मीद में जी रहे हैं कि सड़क बनेगी.
डॉक्टर नहीं रहते हैं
कुरूमगढ़ में स्वास्थ्य उपकेंद्र है. यहां डॉक्टर व नर्स को रहना है, लेकिन डॉक्टर नहीं रहते हैं. जैसा लोग बताते हैं. जब जिले के वरीय अधिकारी आते हैं, तो डॉक्टर आते हैं. नर्स भी अक्सर गायब रहती है. मुश्किल समय में इलाज की सुविधा नहीं मिलती है. स्वास्थ्य उपकेंद्र के भवन की कुछ दिन पहले ही लिपाई-पोताई की गयी है.
बैंक चैनपुर में संचालित है
कुरूमगढ़ के नाम से झारखंड ग्रामीण बैंक है, लेकिन नक्सलियों के डर से यह बैंक वर्षों से चैनपुर प्रखंड मुख्यालय में चल रहा है. इस कारण कुरूमगढ़ व आसपास के करीब 50 गांव के लोगों को बैंक संबंधी काम के लिए चैनपुर आना-जाना करना पड़ता है. लोगों की शिकायत है कि जब बैंक कुरूमगढ़ के नाम से है, तो फिर चैनपुर में क्यों चल रहा है. जब सुरक्षा की बात है, तो कुरूमगढ़ में थाना है और सीआरपीएफ कैंप भी स्थापित है, फिर किस बात का डर है.
शिक्षा का स्तर ठीक नहीं
बुनियादी हाई स्कूल कुरूमगढ़ में शिक्षकों के 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी पांच शिक्षक ही कार्यरत हैं.जिस कारण छात्रों को शिक्षा ठीक ढंग से नहीं मिल पा रही है. साइंस के एक शिक्षक कपिलदेव राय का प्रतिनियोजन कराया गया था, लेकिन राजनीति खेल में उनकी बदली करा दी गयी, जिससे बच्चों को साइंस की पढ़ाई में दिक्कत हो रही है. प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष नीरज शर्मा ने कहा कि वरीय अधिकारियों से कह कर शिक्षक कपिलदेव को कुरूमगढ़ लाया गया था, लेकिन उनपर स्कूल नहीं आने का आरोप लगा कर बदली करा दी गयी.
शराब बंद हो तो बदलेगी तसवीर
कुरूमगढ़ व आसपास के कुछ गांवों के बाजार हाट में हड़िया दारू बिकता है. गांव के कुछ लोगों का मानना है कि अगर प्रशासन इस क्षेत्र में शराबबंदी मुहिम चलाये, तो इस क्षेत्र के विकास में सहायता मिलेगी. क्योंकि बहुत से लोग शराब में अपना जीवन बरबाद कर रहे हैं. उन्हें अच्छी जिंदगी जीने के लिए जरूरी है कि कुरूमगढ़ क्षेत्र में शराबबंदी हो.
खुले में शौच जाते हैं
पीपी बामदा पंचायत में कुरूमगढ़ गांव आता है, लेकिन इस पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है. लोगों ने कहा कि खुले से शौच मुक्त करने के लिए जरूरी है कि इस क्षेत्र में रहने वाले हर एक घर में शौचालय का निर्माण हो.
पर्यटन स्थल बन सकता है
कुरूमगढ़, जिस प्रकार नाम है, उस प्रकार इस क्षेत्र की बनावट भी है. अगर इस क्षेत्र में सड़क, मोबाइल नेटवर्क, बिजली व पानी की व्यवस्था हो, तो यह क्षेत्र सैलानियों के घूमने के लिए बेहतर होगा. यहां सुंदर जंगल व पहाड़ हैं. नदियां है, जहां लोग घूम सकते हैं. प्रयास हो, तो यह पर्यटन स्थल बन सकता है.

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