गुमला: प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादियों के खिलाफ चलाये चला रहे ऑपरेशन के दौरान सीआरपीएफ-218 बटालियन के एएसआइ राजेंद्र सिंह की मौत हो गयी. उनकी मौत कैसे हुई है, इसका अभी तक पता नहीं चला है. उनके शव का गुमला सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया. सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट राकेश ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि एएसआइ की मौत कैसे हुई. वहीं सीआरपीएफ के अधिकारी संजय ने कहा कि नक्सली ऑपरेशन के दौरान हार्ट अटैक से जंगल में ही एएसआइ की मौत हो गयी.
सीआरपीएफ अधिकारी के अनुसार, सीआरपीएफ-218 बटालियन द्वारा लातेहार जिला के महुआडांड़ थाना स्थित मारू माड़ में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चल रहा था.
14 अगस्त को नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन लांच किया गया था. तीन दिन तक ऑपरेशन चला. 16 अगस्त को ऑपरेशन समाप्त किया गया, लेकिन 15 अगस्त को ऑपरेशन के दौरान ही एएसआइ की मौत हो गयी. सभी जवान व अधिकारी पैदल चल रहे थे. पैदल चलने के क्रम में ही एएसआइ जंगल में गिर गये. जबतक दूसरे साथी कुछ समझ पाते, एएसआइ की मौत हो चुकी थी. बताया जा रहा है कि जब एएसआइ की मौत हुई, तो सभी जवान तुरंत हरकत में आ गये.
शुरू में लगा कि नक्सलियों ने हमला किया. जंगल के चारों ओर जांच की गयी. जब नक्सली नहीं मिले, तो एएसआइ के शव को गुमला लाया गया. गुमला के सिलम स्थित सीआरपीएफ कैंप में श्रद्धांजलि सभा हुई, जहां उन्हें अंतिम सलामी दी गयी.
