गुमला : गुमला जिले के 15 वर्ष के किशोर से लेकर 69 वर्ष तक के 70 हजार व्यक्ति धूम्रपान करते हैं. इसमें 38 हजार 500 लोगों का जीवन खतरे में हैं. धूम्रपान और मौत का यह सर्वे व आंकड़ा जिले के स्वास्थ्य विभाग का है. विभाग द्वारा जमा आंकड़ा के अनुसार, 70 हजार में से 70 प्रतिशत लोग अपना वृद्धकाल नहीं देख पायेंगे.
इसका खुलासा बुधवार को उपायुक्त कार्यालय में उपायुक्त श्रवण साय की अध्यक्षता में आयोजित तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की बैठक में हुआ. मामला संज्ञान में आने के बाद उपायुक्त ने तंबाकू नियंत्रण को लेकर पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश दिया. उपायुक्त ने कहा कि जिले में अभियान चला कर तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सुदृढ़ करें. सिगरेट एवं तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (कोटपा) काे शक्ति से लागू करें. सार्वजनिक सहित सरकारी, गैरसरकारी व शिक्षण संस्थानों में तंबाकू सेवन पर रोक लगायें. तंबाकू विक्रय केंद्रों पर भी पदाधिकारियों को नजर रखने का निर्देश दिया. कहा कि नियमित रूप से तंबाकू विक्रय केंद्रों का निरीक्षण करें और धूम्रपान अथवा तंबाकू का सेवन करने वालों पर सिगरेट एवं तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (कोटपा) के तहत कानूनी कार्रवाई करें.
12 सदस्यीय टीम का गठन किया गया.
तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर बैठक में जिला स्तरीय 12 सदस्यीय टीम का गठन किया गया. जिसमें अध्यक्ष एसी आलोक शिकारी कच्छप तथा सीएस डॉक्टर जेपी सांगा, डीएसपी इंद्रमणि चौधरी, डीटीओ विजय वर्मा व केओ कॉलेज गुमला के प्राचार्य प्रोफेसर जीतवाहन बड़ाइक सहित सात अन्य को सदस्य बनाया गया. उपायुक्त ने अनुमंडल स्तर पर एसडीओ और प्रखंड स्तर पर बीडीओ के नेतृत्व में टीम का गठन कर तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने का निर्देश दिया.
