बोआरीजासेर प्रखंड के मेघी पंचायत के सुदूर गांव डहरलंगी में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला व पुरुषों ने हिस्सा लिया. खासकर आदिवासी बाहुल्य गांव के लोगों ने कहा कि उनकी समस्या पहाड़ जैसी है. समाधान मामले में किसी भी जनप्रतिनिधियों ने अब तक ध्यान नहीं दिया है. जनप्रतिनिधियों से भरोसा उठ रहा है. प्रभात खबर के समक्ष अपनी परेशानी को रखते हुए कहा कि अगर उनके माध्यम से परेशानी का समाधान हो जाता है, तो इससे बेहतर बात नहीं हो सकती है. ग्रामीणों ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सड़क, पीने का पानी, आवास, जर्जर आदिवासी समुदाय के पूजा स्थल की समस्याओं को रखा. गांव की आबादी करीब 500 है. गांव को मुख्य सड़क से नहीं जोड़ा गया है. बीमार पड़ने पर मरीज को खाट के सहारे मुख्य सड़क तक लाया जाता है. इसके बाद एंबुलेंस की सुविधा दी जाती है.
नदी पर पुल बनाना जरूरी, बरसात में आवागमन हो जाता है ठप
गांव के बगल में नदी है, जिस पर पुल बनना आवश्यक है. नदी में पानी आ जाने के बाद ग्रामीणों का आना-जाना बंद हो जाता है. ग्रामीण पगडंडी के सहारे आवागमन करते हैं. गांव में करीब-करीब झोपड़ी व कच्चा मकान है. आदिवासी समुदाय के लोगों का पूजा स्थल जर्जर है, जिसके कभी भी टूट कर गिरने से दुर्घटना की संभावना बनी रहती है. पूर्व की सरकार में गांव में दो बोरिंग किया गया है, मगर हैंडल नहीं लगाये जाने की वजह से किसी काम का नहीं रह गया है. मतदान के लिए तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. इसलिए मतदान केंद्र गांव में बनाने की बात पर ग्रामीणों ने जोर दिया. ग्रामीण ताला सोरेन, पंचू किस्कू, सरिता सोरेन, बाबूराम किस्कू, महेंद्र हेंब्रम, बेटाराम सोरेन, सोना लाल मुर्मू आदि ने सभी समस्याओं को विस्तार से बताते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा समस्याओं का जल्द समाधान किया जाये, ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा मिले.क्या है गांव में आवश्यक परेशानी :
गांव के लोगों को वोट डालने के लिए करीब तीन किमी की दूरी तय करनी पड़ती है. गांव का पूजा स्थल जर्जर है. कभी भी ध्वस्त हो सकता है. गांव को अब तक पक्की सड़क से मुख्य मार्ग को नहीं जोड़ा गया है. दो बोर हॉल करके छह माह से छोड़ दिया गया, अब तक हैंडल नहींडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
