गोड्डा में हर साल लाखों का बीज बाजार से खरीदते हैं किसान

सरकारी बीज वितरण की व्यवस्था सवालों के घेरे में, परेशान हो रहे कृषक

गोड्डा जिला एक कृषि प्रधान इलाका माना जाता है, जहां हर साल 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर धान की खेती होती है. इसके बावजूद, जिले के अधिकांश किसान हर वर्ष धान का बीज बाजार से ही खरीदते हैं. जानकारी के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत किसान निजी दुकानों से बीज खरीदते हैं, जबकि सरकारी बीज वितरण प्रणाली का लाभ केवल सीमित संख्या में किसान ही उठा पाते हैं.

सरकारी बीज का वितरण, फिर भी बाजार पर निर्भरता

इस वर्ष कृषि विभाग द्वारा 511 क्विंटल से अधिक धान के बीज का आवंटन किया गया, जिसमें से 301 क्विंटल बीज का वितरण पैक्स, लैम्पस व एफपीसी जैसी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जा चुका है. जिले के 52 पैक्स-लैम्पस और 7 एफपीसी को क्रमशः 375 क्विंटल और 136 क्विंटल बीज दिये गये हैं. जिला कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, सभी संबंधित संस्थाओं को बीज दे दिया गया है और किसानों को वितरण का निर्देश भी जारी किया गया है. लेकिन सवाल यह है कि जब इतना अधिक मात्रा में सरकारी बीज उपलब्ध कराया गया है, तो किसान अब भी बाजार से बीज क्यों खरीद रहे हैं.

बाजार का बीज महंगा, फिर भी किसानों की पहली पसंद

किसान प्रदीप ठाकुर बताते हैं कि जिले में हर साल 2 लाख टन से अधिक बीज बाहर से मंगाया जाता है। बाजार में ये बीज 100 रुपये से 500 रुपये प्रति किलो की दर से बिकते हैं। इसके बावजूद किसान इन्हीं पैक बंद बीजों पर अधिक विश्वास करते हैं। बीज विक्रेता पिंटू कुमार कहते हैं कि किसानों को बाजार में हर क्वालिटी के बीज मिल जाते हैं और वे अपनी पसंद के अनुसार बीज का चयन करते हैं।

छोटे और मंझोले किसानों पर आर्थिक बोझ

जिले में अधिकतर किसान छोटे और मंझोले वर्ग से हैं, जिनकी खेती में लागत पहले ही बहुत अधिक होती है. बीज की खरीद के अलावा खाद, जुताई, पटवन आदि पर भी भारी खर्च आता है. उपज के बाद किसानों के पास केवल सालभर के खाने लायक अनाज ही बच पाता है, जिससे खेती अब उनके लिए लाभकारी नहीं रह गई है.

जांच की दरकार

जिले में हर साल सरकारी बीज का भारी मात्रा में आवंटन होता है, बावजूद इसके किसान निजी बाजार पर निर्भर हैं. यह स्थिति जांच का विषय है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर वितरित सरकारी बीज आखिर पहुंचता कहां है. क्या वितरण प्रणाली में कोई खामी है, या किसानों तक सही समय पर जानकारी नहीं पहुंच पाती.

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By SANJEET KUMAR

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