2 लाख 13 हजार क्विंटल के मुकाबले अब तक 90218 क्विंटल ही हो सका धान क्रय

जिले में धान क्रय का हाल. 1857 किसानों ने क्रय सेंटर पर बेचा है धानस 50 फीसदी से कम किया गया है क्रय

मार्च माह बीतने के कगार पर है. ऐसे में जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीददारी अब तक मात्र कुल लक्ष्य के मुकाबले 50 फीसदी ही हो पायी है. जिले में धान खरीद की प्रक्रिया दिसंबर माह से अपनायी गयी थी. धान खरीद को लेकर राज्य सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद जिले में धान क्रय की प्रक्रिया रेस तो कर दी गयी. परंतु अब तक कुल लक्ष्य का मात्र 50 फीसदी से कुछ कम ही धान क्रय हो पाया है. मालूम हो कि इस बार जिले में धान क्रय के लिए 2.13 लाख क्विंटल लक्ष्य निर्धारित किया गया था. सरकार की ओर से धान क्रय के लिए 22 सौ रुपये का भुगतान किसानों को किया जाना है. किसानों द्वारा बेचे गये धान के एवज में प्रथम किश्त का भुगतान धान के पहुंचने के बाद ही कर दिया जाता है, जबकि दूसरे किश्त का भुगतान धान मिल में पहुंचने के बाद ही किये जाने का सरकारी प्रावधान है.

पिछली बार भी लक्ष्य से कम ही हो पायी थी खरीद

धान क्रय का सरकारी लक्ष्य पूरी नहीं होने की प्रक्रिया में कई कारक जिम्मेवार हैं. एक तो इस मामले में जिस प्रकार से सरकारी सक्रियता होनी चाहिए, वह कम है. विभागीय स्तर पर केवल एमआइएस एंट्री तक ही काम हो पाता है. जितनी सक्रियता व गंभीरता विभाग की होनी चाहिए, उस हिसाब से धान की सरकारी खरीद नहीं हो पाती है. धान क्रय के लिए सहकारी एजेंसियों को लगाया गया है. लेकिन क्रय एजेंसियों की सक्रियता केवल सरकारी टास्क भर ही रही है. इसका खामियाजा हर साल भुगतना पड़ता है. धान का कटोरा कहे जाने वाले गोड्डा जिले में महज एक लाख के समीप ही धान की खरीददारी हो पाती है. जबकि वास्तविकता देखें तो हर साल जिले में 20 लाख टन के समीप धान की पैदावार होती है. धान को किसान गांव के सेठ, साहूकार व बिचौलियों के हाथों में बेच देते हैं. इससे किसानों को एकमुश्त नकदी का भुगतान हो जाता है.

एकमुश्त भुगतान नहीं होने से किसानों का हो रहा है मोहभंग

सरकारी धान क्रय कम होने के लिए कई कारक जिम्मेवार हैं. जिसमें एक सरकारी खरीद में धान का एकमुश्त भुगतान नहीं होना है. मालूम हो कि किसानों के धान क्रय की पहली किश्त को किसान के खाते में पहुंच जाता है. लेकिन दूसरे किश्त के भुगतान मे काफी देरी होती है. इस बार भी दूसरे किश्त के भुगतान में एक-दो माह का समय लग गया है. ऐसे में किसानों का इस प्रणाली से मोहभंग हो रहा है. इसका असर किसानों पर देखा जा सकता है. इस बार मात्र 1857 किसानों ने ही सरकारी क्रय सेंटर पर अपने धान को बेचा है. पिछले साल इसकी संख्या 3 हजार से अधिक थी. सरकारी स्तर पर धान की खरीददारी हो, इसके लिए डीसी जिशान कमर के स्तर से पिछले साल से ही जोरशोर से कवायद की जा रही थी. डीसी के निर्देश पर अब तक जिले भर में रिकॉर्ड किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है. तकरीबन 15 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन धान क्रय में किया गया है. इसके बावजूद मार्च माह की समाप्ति होने तक लक्ष्य के अनुरूप धान क्रय नहीं किया जा सका है. फरवरी माह तक तो धान क्रय के लिए किसानों की भीड़ पैक्स में जुटा रहा. मार्च माह में तो पैक्स पर किसानों की भीड़ जुटनी ही बंद हो गयी. इसका परिणाम हुआ कि आधे से भी कम धान की खरीद हो पायी है.

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Author: SANJEET KUMAR

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