गोड्डा जिले में महंगाई अब सीधे आम आदमी की थाली तक पहुंच चुकी है. पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों ने न केवल घरेलू बजट को प्रभावित किया है, बल्कि बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों में जबरदस्त उछाल ला दिया है. विशेष रूप से मिठाई, मांस और मसालों के दाम बढ़ने से आम जनता बेहाल है. शहर की गलियों से लेकर मेन बाजार तक सजी मिठाई की दुकानों पर रौनक कम दिख रही है. रसोई गैस की आपूर्ति में कमी और व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमतों में हालिया वृद्धि (सोमवार को 2254.50 रुपये तक) के कारण दुकानदारों को मजबूरी में मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़े हैं. खोआ आधारित मिठाइयों जैसे रसगुल्ले, बर्फी, रसमलाई, मिल्क केक, बेसन लड्डू और काजू कतली के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं. कई दुकानों ने पैकिंग का साइज छोटा कर ग्राहक पर बोझ कम करने की कोशिश की है. होटल और रेस्टोरेंट संचालक भी महंगाई से अछूते नहीं हैं; कई ने अस्थायी रूप से बंद या काम घटा दिया है.
गैस की किल्लत की वजह
गोड्डा में उपभोक्ताओं को गैस रिफिल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में देरी और बैकलॉग पैदा हुआ है. मिठाई दुकानदारों के अनुसार, खोआ बनाने और चाशनी तैयार करने की हर प्रक्रिया गैस पर निर्भर है, जिससे उत्पादन लागत सीधे बढ़ रही है.चिकन, मटन और मसालों के दाम बढ़े
मांसाहारी भोजन पसंद करने वालों पर भी महंगाई का असर पड़ा है. चिकन में 20 से 50 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है. मटन की कीमतों में 200 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है. जीरा, धनिया, मिर्च और अन्य बुनियादी मसालों के दाम भी पिछले एक पखवाड़े में बढ़ गये हैं. स्थानीय निवासी और उपभोक्ता प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाये और जमाखोरी करने वाले बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई की जाये ताकि महंगाई से कुछ राहत मिल सके.
