आसमान से बरस रही आग, धूप में छांव तलाश रहे हैं बेजुबान पशु

गोड्डा में भीषण गर्मी का कहर, जल संकट से जनजीवन प्रभावित

मई माह के मध्य में ही जिले में सूरज के तीखे तेवर देखने को मिल रहे हैं. तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने से भीषण गर्मी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. दोपहर के समय आसमान से बरसती लू और गर्म हवाओं ने लोगों का घर से निकलना मुश्किल कर दिया है. सबसे अधिक मार उन बेजुबान पशु-पक्षियों पर पड़ रही है, जो पानी और छांव की तलाश में भटकने को मजबूर हैं. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा गाय, सांड और कुत्ते भीषण गर्मी से बुरी तरह प्रभावित हैं. दोपहर होते ही सड़कें तपती भट्टी जैसी हो जाती हैं, जिससे ये पशु पेड़ों की छांव, बंद दुकानों के शटर या वाहनों के नीचे शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं. कई स्थानों पर आवारा कुत्तों को हांफते हुए और नालियों के पास पानी की तलाश करते देखा जा रहा है. तालाब और अन्य पारंपरिक जलस्रोत सूख जाने से स्थिति और गंभीर हो गयी है. ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश तालाब, बांध और डोभा पहले ही सूख चुके हैं. जो थोड़े बहुत जलस्रोत बचे हैं, उनका पानी भी कीचड़ में बदल चुका है. पशुपालकों के अनुसार, मवेशियों को पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण उन्हें दूर-दराज क्षेत्रों तक पानी ले जाना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीएचइडी की लापरवाही के कारण स्थिति और खराब हुई है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई चापाकल महीनों से खराब पड़े हैं, जबकि लाखों रुपये की लागत से बनी सोलर जलमीनारें रखरखाव के अभाव में बंद पड़ी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही. गंभीर जल संकट को लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है. लोगों ने मांग की है कि खराब पड़े चापाकलों की तत्काल मरम्मत करायी जाये और जरूरत पड़ने पर टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाये, अन्यथा स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है.

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Author: SANJEET KUMAR

SANJEET KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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