पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता के लिए जन-जागरुकता जरूरी

डालसा द्वारा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से संबंधित मामलों पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में परिवारों को न्याय दिलाने और आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए ईमानदार प्रयास जरूरी हैं। न्यायाधीश ऋचा श्रीवास्तव ने हादसों की त्वरित जांच और रिपोर्टिंग पर जोर दिया। पुलिस और अन्य अधिकारियों को संवेदनशीलता और कर्तव्य पालन के प्रति सजग रहने की सलाह दी गई। अधिवक्ताओं ने मानव तस्करी, नालसा एक्ट, चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट समेत विभिन्न विषयों पर जागरूकता बढ़ाई। जिलाध्यक्षों ने पीएलवी की भूमिका की अहमियत बताई। अंत में, जैकेट वितरण किया गया और धन्यवाद ज्ञापन हुआ।

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से संबंधित मामलों पर कार्यशाला में बोले जज कोर्ट प्रतिनिधि, गोड्डा डालसा की ओर से गुरुवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित पुस्तकालय सभागार में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से संबंधित मामलों पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार, जिला जज प्रथम कुमार पवन, द्वितीय निरूपम कुमार, जिला जज तृतीय ऋचा श्रीवास्तव, जिला जज पंचम नीरज विश्वकर्मा, डालसा के सचिव दीपक कुमार, एसडीओ बैद्यनाथ उरांव, प्रशिक्षु डीएसपी कुमार गौरव, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार झा, महासचिव योगेश चंद्र झा आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर पीडीजे रमेश कुमार ने कहा कि मोटर दुर्घटना में जिन परिवारों के मुख्य व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, ऐसे परिवारों के चेहरे पर खुशी लौटाने के लिए हमें ईमानदार पहल करने की आवश्यकता है. जिला प्रशासन द्वारा भी दुर्घटना में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मुहैया कराने का प्रावधान है. इसके लिए जनजागरूकता जरूरी है. खासकर पीएलवी को भी इस दिशा में ईमानदार प्रयास करने की जरूरत है. यदि कोई परेशानी हो तो डालसा सचिव या मुझे फोन कर जानकारी देने की सलाह दी. तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि जब आप पदधारक होते हैं तो आपका पर्सनल लाइफ मायने नहीं रखता. पदधारक के लिए ड्यूटी सर्वोपरि है. हम किसी पर एहसान नहीं कर रहे हैं बल्कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं. मोटर वाहन दुर्घटना के क्लेम में सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस विभाग की है. अनुसंधानकर्ता को एमएसीटी क्लेम से संबंधित सभी जानकारी होनी चाहिए. नए प्रावधान के अनुसार दुर्घटना के 48 घंटे के भीतर जांच अधिकारी (आईओ) को ट्रिब्यूनल को रिपोर्ट सौंपना होता है. दुर्घटना के बाद से ही, प्राथमिकी दर्ज करने के समय से ही प्रपत्र को भरने से सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारी एकत्रित करने में गंभीर रहना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि मोटर दुर्घटना की स्थिति में मानवीय संवेदना के आधार पर भी कदम उठाने की जरूरत है. एसडीओ बैद्यनाथ उरांव ने वाहन दुर्घटना संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी. प्रशिक्षु डीएसपी कुमार गौरव ने पुलिस पदाधिकारी को मोटर क्लेम के मामले में सभी पहलुओं पर ध्यान रखते हुए अनुसंधान करने की सलाह दी. इसी कड़ी में कार्यशाला का संचालन कर रही अधिवक्ता नूतन तिवारी ने नालसा एसीड अटैक पर, अधिवक्ता धर्मेन्द्र नारायण ने मानव तस्करी पर, एलएडीसी चीफ संजय सहाय ने लीगल सर्विस रेगुलेशन एक्ट एवं एक्सेस टू जस्टिस पर, अधिवक्ता अजय प्रसाद साह ने चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट तथा चाइल्ड कनफ्लिक्ट विद लॉ पर विस्तृत प्रकाश डाला और इसमें पीएलवी की भूमिका को अहम बताया. धन्यवाद ज्ञापन डालसा के सचिव दीपक कुमार ने किया. इस मौके पर जिले के सभी अधिकार मित्रों के बीच जैकेट का वितरण किया गया. कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ. एसएस शर्मा, न्यायिक पदाधिकारीगण, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी पूर्णिमा सिन्हा, इंस्पेक्टर मधुसूदन मोदक, विभिन्न थानों के प्रभारी, एलएडीसी, अधिवक्ता एवं पीएलवी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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By Prabhat Khabar News Desk

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