राम का उपासक बनने से विरोधी स्वतः समाप्त हो जाते हैं, विनम्रता ही श्रेष्ठता की कुंजी : पंडित रवि शंकर महाराज

डांड़े दुर्गा मंदिर में श्रीराम कथा के आठवें दिन पंडित रविशंकर ठाकुर ने दिये जीवन के महत्वपूर्ण संदेश

पोड़ैयाहाट प्रखंड के डांड़े दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन पंडित रविशंकर ठाकुर जी महाराज ने भक्तों को जीवन के महत्वपूर्ण संदेश दिये. उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति राम का उपासक बन जाता है, तो उसके विरोधी स्वतः समाप्त हो जाते हैं. भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिना अनुराग के राम नहीं मिल सकते. धरती पर पहला यज्ञ प्रयाग में हुआ था. सभी को बोलना आता है, लेकिन चुप रहना बहुत कम लोग जानते हैं. जो चुप रहना सीख लेता है वही सच्चा संत कहलाता है. महाराज ने कहा कि जिस दिन विभीषण लंका छोड़कर चले गये, उसी दिन से रावण का पतन प्रारंभ हो गया. उन्होंने सभी को सिखाया कि जीवन में सदा संतों का आदर करना चाहिए, क्योंकि संत भगवान का दूसरा स्वरूप होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी को ऊंचाई और श्रेष्ठता प्राप्त करनी है, तो उसे विनम्र बनना सीखना होगा. रामचरितमानस के आदि कवि के संदर्भ में उन्होंने बताया कि भगवान शंकर स्वयं आदि कवि हैं-रचि महेश निज मानस राखा. इसके बावजूद भगवान शंकर को रामकथा सुनने की इच्छा हुई क्योंकि यह मर्यादा और धर्म का विषय है. भगवान शंकर ने कैलाश की ऊंचाई का त्याग कर दंडकारण्य में अगस्त्य ऋषि के आश्रम जाकर रामकथा सुनी. यह बताता है कि जब किसी श्रेष्ठ से ज्ञान या उपलब्धि प्राप्त करनी हो, तो पहले विनम्र होना पड़ता है. महाराज ने मां सती और भगवान शिव के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मां सती ने रामकथा के भाव को समझने में भूल की, तो उन्होंने रामजी की परीक्षा लेकर कथा का अपमान किया. परिणामस्वरूप भगवान शंकर ने उन्हें समझाने के बाद भी त्याग दिया. यह इस बात का प्रतीक है कि धर्मविरुद्ध आचरण का फल सदैव दुखद होता है. इस दौरान गोड्डा की प्रसिद्ध महिला चिकित्सक डॉ. प्रभा रानी प्रसाद और सामाजिक कार्यकर्ता श्यामाकांत यादव भी उपस्थित थे.

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By Sanjeet kumar

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