गोड्डा जिले में बुनियादी ढांचे के विकास ने विकास की रफ्तार बढ़ा दी है. विशेष रूप से एनएच-133 को फोरलेन में बदलने से इलाके की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल गयी है. यह मार्ग गोड्डा को बिहार और झारखंड के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जोड़ता है और अब जिले की जीवनरेखा बन चुका है. फोरलेन होने से यात्रा का समय कम हुआ है और भारी वाहनों व लॉजिस्टिक्स की आवाजाही सुगम होने से स्थानीय व्यापार को नयी उड़ान मिली है. वहीं, एनएच-333ए गोड्डा को बिहार के बांका, जमुई और शेखपुरा जिलों से जोड़ती है. इस मार्ग का पाकुड़ तक विस्तार सुदूरवर्ती गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत कर रहा है.
एसपीटी एक्ट के बावजूद रियल एस्टेट में उछाल
सड़क चौड़ीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के चलते गोड्डा में रियल एस्टेट के बाजार में तेज़ी देखी गयी है. हाईवे के किनारे भूखंडों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में 5 से 10 गुना वृद्धि हुई है. शहर के बाहरी इलाकों में जहां पहले खेती होती थी, अब बड़े गोदाम, शोरूम और आवासीय कॉलोनियों का निर्माण हो रहा है. अडानी पावर प्लांट के बाद बेहतर सड़क नेटवर्क ने छोटे उद्योगों के आने की संभावना बढ़ा दी है और परिवहन तथा निर्माण क्षेत्रों में हजारों युवाओं को रोजगार मिल रहा है.सांसद डॉ. निशिकांत दुबे की पहल से रोजगार और विकास को मिलेगा पंख
गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे जिले के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. राज्य सरकार के नकारात्मक रवैये के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे दो आधुनिक हाइवे विलेज विकसित करने की योजना बनायी है. इनके बनने से यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी, जिसमें आधुनिक विश्राम गृह, फूड कोर्ट, रेस्तरां, ईंधन और सर्विस स्टेशन, हाट-बाजार शामिल होंगे. यह परियोजना पोडैयाहाट प्रखंड के कठौन और पथरगामा के समीप होगी. दो हाईवे विलेज के निर्माण से गोड्डा के युवाओं और स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे. इस पहल से गोड्डा न केवल परिवहन हब बनेगा बल्कि जिले की आर्थिक और औद्योगिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल जाएगी.
