शुक्रवार की शाम चार बजे अचानक आए तेज आंधी, बारिश और बर्फबारी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. खासकर मकई की फसल को भारी नुकसान हुआ है. तेज हवा के झोंकों के कारण खेतों में खड़ी मकई की फसल बड़े पैमाने पर गिर गयी. कई जगहों पर पूरे खेत ही औंधे मुंह गिरे मकई के पौधों से भर गये हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है. पोड़ैयाहाट प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र में मकई, गेहूं और सरसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है. इन दिनों खेतों में मकई की फसल अच्छी स्थिति में थी और किसान बेहतर उत्पादन की उम्मीद लगाये बैठे थे. लेकिन अचानक आई तेज आंधी ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया. लंबे मकई के पौधे तेज हवा का दबाव सह नहीं सके और बड़ी संख्या में जमीन पर गिर गये. किसानों का कहना है कि इस समय फसल दाने बनने की स्थिति में थी, इसलिए पौधों का गिर जाना उत्पादन पर सीधा असर डालेगा. कई जगह पौधे जड़ों समेत उखड़ गये हैं, जबकि कुछ खेतों में पौधे पूरी तरह जमीन पर लेट गये हैं. इससे भुट्टों के सड़ने और दाने खराब होने की आशंका भी बढ़ गयी है.
मौसम की मार और किसानों की आर्थिक चिंता
स्थानीय किसानों ने बताया कि इस साल मौसम की मार ने पहले ही खेती को प्रभावित किया है. कभी अनियमित बारिश और कभी तेज हवाओं ने फसलों को नुकसान पहुंचाया. अब आंधी-तूफान से मकई की फसल के गिर जाने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है. कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है और उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी. किसानों का कहना है कि खेतों में गिरे पौधों को दोबारा खड़ा करना लगभग असंभव है. ऐसे में बची हुई फसल से ही कुछ उत्पादन मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम ज्यादा खराब नहीं रहा तो कुछ हद तक फसल संभल सकती है, लेकिन उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है.किसानों ने की मुआवजे की मांग
ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान में सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए. फिलहाल किसान मौसम के स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन खेतों में औंधे मुंह गिरे मकई के पौधे उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पड़े तूफान की कहानी बयां कर रहे हैं.
